सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश में एक परिवार पर इस्लाम कबूल करने का दबाव डालने के आरोपी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगा दी है। आरोपी हर्मन टेलर का दावा है कि वह खुद हिंदू धर्म का पालन करता है और उसने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मध्य प्रदेश में एक परिवार को इस्लाम में धर्मांतरण के लिए मजबूर करने के आरोपी व्यक्ति के खिलाफ आगे की आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगा दी, भले ही वह खुद हिंदू धर्म को मानने का दावा करता है।
जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की बेंच ने अंतरिम आदेश पारित किया और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली उसकी याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें मप्र धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 3 और 5 के तहत दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इनकार कर दिया गया था।
क्या है पूरा मामला?
सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता हर्मन टेलर के वकील ने तर्क दिया कि शिकायतकर्ता के पति द्वारा कथित तौर पर इस्लाम कबूल करने के लगभग आठ साल बाद एफआईआर दर्ज की गई थी।
यह मामला उस व्यक्ति की पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर से जुड़ा है, जिसने कथित तौर पर टेलर के प्रभाव में आकर इस्लाम अपना लिया था। वकील ने दलील दी कि टेलर और उसका परिवार हिंदू धर्म को मानते हैं और इस संबंध में उन्होंने रिकॉर्ड पर दस्तावेज भी रखे थे।
अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि धर्मांतरण के बाद, पति ने अपनी पत्नी और उनके नाबालिग बेटे पर भी इस्लाम कबूल करने के लिए दबाव डालना शुरू कर दिया, जो कथित तौर पर टेलर के कहने पर किया गया था।
शिकायत के आधार पर, पुलिस ने टेलर के खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज किया और उसके बाद उसके खिलाफ चार्जशीट दायर की।
हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी याचिका
इसके बाद, टेलर ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग करते हुए कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह पता चले कि उसने शिकायतकर्ता (पत्नी) या उसके बेटे को धर्म बदलने के लिए कोई प्रयास किया था।
हाईकोर्ट ने आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया और पाया कि आरोप गंभीर प्रतीत होते हैं और कहा कि उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे ट्रायल के विषय हैं।
हाईकोर्ट ने कहा था कि प्रथम दृष्टया ऐसे सबूत हैं जो उसे कथित अपराध से जोड़ते हैं और यह भी नोट किया कि शिकायतकर्ता और उसके नाबालिग बेटे के बयानों में शिकायतकर्ता के परिवार पर दबाव डालने में याचिकाकर्ता की भूमिका का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है।
हाईकोर्ट के इस फैसले से व्यथित होकर टेलर ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। (एएनआई)
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