पश्चिम बंगाल के बीरभूम में हुई हिंसा का मामला सोमवार को बंगाल विधानसभा में उठा। इस दौरान टीएमसी और भाजपा के विधायकों के बीच मारपीट हो गई। भाजपा के पांच विधायकों को निलंबित कर दिया गया है। 

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के बीरभूम (Birbhum violence) में 22 मार्च की रात उग्र भीड़ ने 10 घरों को जला दिया था, जिससे आठ लोगों की मौत हुई थी। इस मामले ने राज्य की राजनीति में उबाल ला दिया है। सोमवार को विधानसभा में टीएमसी और भाजपा के विधायकों के बीच हाथापाई और मारपीट हो गई। इसके चलते भाजपा के पांच विधायकों को निलंबित कर दिया गया है।

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घटना के दौरान भाजपा विधायक मनोज तिग्गा के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई। टीएमसी विधायक असित मजूमदार ने भी यह दावा किया कि हंगामे के दौरान उन्हें चोटें आईं। भाजपा नेता अमित मालवीय ने एक वीडियो ट्विटर पर पोस्ट किया है। इसमें दिख रहा है कि विधायकों का समूह एक-दूसरे को धक्का दे रहा है। इस दौरान माननीय एक-दूसरे पर चिल्ला रहे हैं। सदन के अंदर अफरा-तफरी मची है। 

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बंगाल विधानसभा के अंदर हाथापाई में कथित संलिप्तता के लिए भाजपा के पांच विधायक सुवेंदु अधिकारी, मनोज तिग्गा, नरहरि महतो, शंकर घोष और दीपक बर्मन को निलंबित कर दिया गया है।

क्यों हुई हाथापाई?



भाजपा विधायकों ने आरोप लगाया कि वे बीरभूम हिंसा मामले पर चर्चा की मांग कर रहे थे। इस दौरान टीएमसी के विधायकों ने उनके साथ मारपीट की। भाजपा नेता अमित मालवीय ने कहा कि टीएमसी विधायकों ने मुख्य सचेतक मनोज तिग्गा सहित भाजपा विधायकों पर हमला किया। क्योंकि वे रामपुरहाट में हुए नरसंहार पर चर्चा की मांग कर रहे थे।

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क्या है बीरभूम हिंसा मामला?
बंगाल के बीरभूम में 22 मार्च को घरों में आग लगने से आठ लोगों की मौत हो गई थी। अज्ञात हमलावरों ने मंगलवार तड़के पेट्रोल बम फेंके और 10 घरों में आग लगा दी थी। यह घटना स्थानीय पंचायत के सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उप प्रमुख की कथित हत्या के बाद हुई।

शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट ने मामले को जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया। इसके बाद, सत्तारूढ़ टीएमसी ने भाजपा पर पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में हुई हत्याओं की सीबीआई जांच को प्रभावित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।

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