संभल जामा मस्जिद सर्वे के बाद हुई हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट ने रिपोर्ट सार्वजनिक करने पर रोक लगाई। 8 जनवरी तक ट्रायल कोर्ट को कोई एक्शन नहीं लेने का निर्देश दिया गया।

Sambhal mosque survey case: यूपी के संभल में सांप्रदायिक हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट की नजर है। संभल जामा मस्जिद में सर्वे के बाद हुई हिंसा के बाद कोर्ट ने रिपोर्ट को सार्वजनिक करने पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रॉयल कोर्ट से कहा कि 8 जनवरी तक केस में कोई एक्शन नहीं लेना है। शांति जरूरी है।

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दरअसल, मस्जिद सर्वे पर रोक लगाने के लिए मस्जिद कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। संभल में मस्जिद सर्वे के दौरान हुई हिंसा में चार लोगों की जान जा चुकी है। इस हिंसा के मामले में कई सौ लोगों पर केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने सांसद जिया-उर-रहमान बर्क और विधायक नवाब इकबाल महमूद के बेटे नवाब सुहैल इकबाल समेत 2,500 लोगों पर 7 अलग-अलग FIR दर्ज की हैं।

क्या है संभल सांप्रदायिक हिंसा केस?

यूपी के संभल जिले में शाही जामा मस्जिद के सर्वे ने सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ दिया है। जामा मस्जिद को लेकर हिंदू पक्ष का दावा है कि वहां हरिहर मंदिर है। सीनियर वकील हरिशंकर जैन समेत 8 लोगों ने सिविल जज (सीनियर डिवीजन) में याचिका दायर की। कोर्ट ने सुनवाई करते हुए मस्जिद की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी का आदेश दिया। 29 नवम्बर तक कोर्ट ने सर्वे रिपोर्ट भी पेश करने का आदेश दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पहला सर्वे 19 नवंबर को हुआ लेकिन अंधेरा होने की वजह से इसे रोकना पड़ा। इसके बाद दुबारा सर्वे के लिए एडवोकेट कमिश्नर की अगुवाई में रविवार 24 नवंबर की सुबह टीम पहुंची। सर्वे के दौरान मस्जिद के आसपास हजारों लोगों की भीड़ इकट्ठी हो गई। लोग सर्वे का विरोध करने लगे। इसी बीच शरारती तत्वों ने पथराव कर दिया जिसके बाद स्थितियां बिगड़ गई। पुलिस ने स्थितियों को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और हवाई फायरिंग भी की थी। इस घटना में गोली लगने से तीन लोगों की मौत हो गई। परिजन पुलिस पर गोली मारने का आरोप लगा रहे जबकि प्रशासन पुलिस की गोलीबारी से इनकार कर रहा।

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