सूत्रों के अनुसार, तलिबान ने ये कहते हुए 70 सिखों और हिन्दुओं को टुकड़ी को रोक दिया कि वो अफगानी हैं और इस देश को छोड़कर वापस नहीं जा सकते हैं।

काबुल. अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद लोग वहां से अपने-अपने देश को भाग रहे हैं। भारत भी अफगानिस्तान में फंसे अपने नागरिकों को एयरलिफ्ट कर रहा है। इसी बीच तालिबान ने शनिवार को भारतीय वायु सेना (IAF) के विमान में सवार होने आ रहे 70 अफगान सिखों और हिंदुओं की एक टुकड़ी को रोक दिया है। सूत्रों के अनुसार, उन्हें काबुल एयरपोर्ट से वापस भेज दिया गया है।

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क्यों रोका गया
सूत्रों के अनुसार, तलिबान ने ये कहते हुए 70 सिखों और हिन्दुओं को टुकड़ी को रोक दिया कि वो अफगानी हैं और इस देश को छोड़कर वापस नहीं जा सकते हैं। तलिबानी लड़ाकों ने उन्हें काबुल एयरपोर्ट से वापस कर दिया। बता दें कि काबुल एयरपोर्ट पर अमेरिकी सेना का कब्जा है जबकि एयरपोर्ट के बाहर तलिबान के लड़ाके बैठे हुए हैं और लोगों को एयरपोर्ट जाने से रोक रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस ग्रुप में दो अल्पसंख्यक सांसद भी शामिल थे। 

विश्व पंजाबी संगठन (WPO) के अध्यक्ष विक्रमजीत सिंह साहनी ने कहा कि भारत लौटने के लिए अफगान सिखों और हिंदू एयरपोर्ट के बाहर इंतजार कर रहा थे तभी तालिबान लड़ाकों ने उन्हें IAF के विमान में चढ़ने से रोक दिया और कहा कि वे अफगानी हैं, इसलिए वे देश नहीं छोड़ सकते हैं।

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भारतीय सुरक्षित
इस बीच शनिवार को एक खबर आई थी कि काबुल एयरपोर्ट के पास तालिबानी करीब 150 लोगों को अपने साथ ले गए हैं। बताया जा रहा था कि इसमें ज्यादातर भारतीय हैं। फिलहाल, सरकारी सूत्रों से खबर मिली है कि सभी भारतीय सुरक्षित हैं और उन्हें दोपहर का खाना भी दिया गया था।

सरकार बनाने को लेकर चल रहा है मंथन
तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा तो कर लिया है, लेकिन सरकार चलाने के लिए कोई रोडमैप सामने नहीं रखा है। तालिबान का को-फाउंडर मुल्ला अब्दुल गनी बरादर काबुल में है और वहां अफगानिस्तान में समावेशी सरकार स्थापिक करने के लिए बातचीत करेगा।