संसद में डीएमके के सांसद रामालिंगम और आईजेके के सांसद पारीवेन्दर ने केंद्र सरकार पूछा था कि तमिलनाडु राज्य का बंटवारा किया जा रहा है क्या? अगर बंटवारा होना है वो बताए कि इस बंटवारे के पीछे क्या वजह है और इसका उद्देश्य क्या है?

नई दिल्ली। तमिलनाडु राज्य के बंटवारे की चर्चा जोरों पर है। बीजेपी के कई विधायक-सांसद कोंगु नाडु बनाने की चर्चाओं को हवा दे रहे हैं। हालांकि, लोकसभा (Lok sabha) में सरकार की ओर से इस बारे में जवाब दिया गया कि कोंगु नाडु बनेगा या नहीं? 

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मानसून सत्र (Monsoon Session) में तमिलनाडु (Tamil Nadu) के सांसदों ने राज्य के बंटवारे के बारे में सरकार से सवाल किया था। संसद में डीएमके के सांसद रामालिंगम (Ramalingam) और आईजेके (Indhiya Jananayaga Katchi) के सांसद पारीवेन्दर (Parivender) ने केंद्र सरकार पूछा था कि तमिलनाडु राज्य का बंटवारा किया जा रहा है क्या? अगर बंटवारा होना है वो बताए कि इस बंटवारे के पीछे क्या वजह है और इसका उद्देश्य क्या है? 

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने दिया जवाब

तमिलनाडु के सांसदों के सवाल पर केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय (Nityanand Rai) ने बताया कि राज्यों के बंटवारे को लेकर समय समय पर लोगों और संगठनों द्वारा मांग उठती रही है। किसी भी राज्य के बंटवारे को लेकर कई आयामों पर विचार विमर्श किया जाता है। सरकार इन सभी जरुरी तथ्यों को देखने के बाद ही नये राज्य बनाने पर विचार करती है। उन्होंने बताया कि सरकार के पास अभी राज्य बंटवारे को लेकर कोई प्रोपोजल नहीं है। 

डीएमके को जवाब देने के लिए स्थानीय बीजेपी नेताओं ने शुरू की थी चर्चा

तमिलनाडु के पश्चिमी इलाके कोंगु नाडु को अलग राज्य बनाने की चर्चा और मांग बीते विधानसभा चुनाव के बाद उठी थी। डीएमके की जीत के बाद विपक्षी नेताओं ने अलग राज्य बनाने का दावा और चर्चा तेज कर दिया था। इसी बीच तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष एल मुरुगन को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। इस विस्तार के बाद तमिलनाडु बंटवारे की चर्चा तेज हो गई थी। 

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में भी राज्य विभाजन को लेकर दावे किए जा रहे थे। कोंगुनाडु क्षेत्र यानि तमिलनाडु के पश्चिमी क्षेत्र के कोयंबटूर की विधायक व बीजेपी महिला मोर्चा की अध्यक्ष वनथी श्रीनिवासन ने भी फेसबुक पेज पर कोंगु (Kongu) का भौगोलिक मैप जारी कर इस चर्चा और बढ़ा दिया था। 

हालांकि, डीएमके और सहयोगी दलों ने इस बंटवारे की चर्चा आम होते ही सख्त आपत्ति जताते हुए विभाजन का विरोध किया था। 

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