एनसीआरबी की 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 में 2018 की तुलना में एसिड अटैक के मामलों में 5.26% की वृद्धि हुई है। पिछले साल देशभर में एसिड अटैक की 240 घटनाएं सामने आईं हैं। वहीं, 2018 में 228 घटनाएं सामने आईं थीं। जबकि 2017 में यह आंकड़ा 244 था।

नई दिल्ली. 'कितना अच्छा होता अगर एसिड बिकता ही नहीं, मिलता ही नहीं तो फिकता नहीं'...वैसे तो ये महज एक फिल्म का डायलॉग है। दीपिका पादुकोण की जनवरी 2020 में एक फिल्म आई थी, नाम था छपाक। दीपिका ने फिल्म में एसिड अटैक सर्वाइवर का किरदार निभाया था। दीपिका का यह डायलॉग उत्तर प्रदेश में हुई एसिड अटैक की घटना पर चरितार्थ होता है। राज्य के गोंडा जिले में सोमवार रात तीन नाबालिग बहनों पर एसिड फेंका गया। जितनी वीभत्स ये घटना है कि उससे भी कहीं ज्यादा डरावने एनसीआरबी के 2019 के आंकड़े हैं, जिनसे देश में एसिड अटैक की घटनाओं के बारे में पता चलता है। 

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एनसीआरबी की 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 में 2018 की तुलना में एसिड अटैक के मामलों में 5.26% की वृद्धि हुई है। पिछले साल देशभर में एसिड अटैक की 240 घटनाएं सामने आईं हैं। वहीं, 2018 में 228 घटनाएं सामने आईं थीं। जबकि 2017 में यह आंकड़ा 244 था।


60 बार एसिड फेंकने की कोशिश की गई
रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 में 60 बार एसिड फेंकने की कोशिश की गई। 2018 में 59 और 2017 में 65 बार ये कोशिश की गई थी।

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एसिड अटैक के मामले में प. बंगाल सबसे आगे 
एसिड अटैक के मामले में प. बंगाल सबसे आगे है। राज्य में 2019 में एसिड फेंकने की 53 घटनाएं सामने आईं। वहीं, दूसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश हैं। जहां एसिड अटैक के 47 केस सामने आए। 2018 की बात करें तब भी बंगाल इस मामले में सबसे आगे था। उस साल राज्य से एसिड अटैक की 50 घटनाएं सामने आई थीं। जबकि उप्र में 40 मामले सामने आए थे। प बंगाल और उत्तर प्रदेश के बाद बिहार में (15), मध्यप्रदेश में (12) और पंजाब में (11) घटनाएं सामने आईं। 

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 210 लोग हुए गिरफ्तार
एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक, एसिड अटैक के केस में इस साल 210 लोग गिरफ्तार हुए हैं। इनमें 192 पुरुष और 18 महिलाएं शामिल हैं। वहीं, 189 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है।