भारतीय सेना का अत्याधुनिक सर्विलांस सिस्टम 'संजय' दुश्मनों की हरकतों पर नज़र रखेगा। गणतंत्र दिवस परेड में इसकी पहली झलक दिखेगी। यह सिस्टम सीमा सुरक्षा को मजबूत करेगा और सेना को रणनीतिक लाभ प्रदान करेगा।

Sanjay-The Army surveillance system: महाभारत में संजय, कुरुक्षेत्र से दूर हस्तिनापुर के राजमहल में महाराज धृतराष्ट्र को पूरे युद्ध का आंखों देखी बताते थे। लेकिन अब आधुनिक भारत का संजय, हमारे देश के दुश्मनों की नापाक हरकतों का जवाब देने के लिए हमारी सेना को एडवांस टेक्नोलॉजी और डेटा से अलर्ट करता रहेगा। भारतीय सेजना का अत्याधुनिक सर्विलांस सिस्टम संजय का पहला सार्वजनिक प्रदर्शन 26 जनवरी को नेशनल परेड में कर्तव्य पथ पर होने जा रहा है। इसके पहले शुक्रवार को डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने इसको आधिकारिक तौर पर लांच किया।

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क्या है संजय?

संजय, भारतीय सेना का अत्याधुनिक सर्विलांस सिस्टम है। अत्याधुनिक सर्विलांस सिस्टम 'संजय - द बैटलफील्ड सर्विलांस सिस्टम (बीएसएस)' की लांचिंग के बाद यह भारतीय सेना को टेक्निकली और स्ट्रैटेजिकली मजबूती प्रदान करेगा। यह इंडियन आर्मी के सर्विलांस सिस्टम के और एडवांस होने की कड़ी में बड़ा कदम है। संजय का पहला सार्वजनिक प्रदर्शन 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर 76वें गणतंत्र दिवस परेड में किया जाएगा। अत्याधुनिक सेंसर और एनालसिस टेक्निक्स से लैस यह सिस्टम सीमा सुरक्षा को और मजबूत करेगा। यह घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम करने, खुफिया जानकारी जुटाने और निगरानी के स्तर को एक नई ऊंचाई तक पहुंचाने में सक्षम होगी।

संजय को दो एरिया के लिए डिजाइन किया गया

संजय सिस्टम को दो तरह के वाहनों के लिए डिजाइन किया गया है। पहले तरह का वाहन वह होगा जो मैदानी क्षेत्रों या रेगिस्तानों के लिए होगा। इस वाहन के सर्विलांस सिस्टम संजय की डिजाइन कुछ अलग है तो दूसरा वाहन पहाड़ी क्षेत्रों में तैनाती के लिए होगा। इसकी डिजाइन भी कुछ उसके हिसाब से है। मैदानी व रेगिस्तानी क्षेत्र के संजय सिस्टम वाहन का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कर्नल श्रुतिका दत्ता करेंगी। तो पहाड़ी क्षेत्रों के लिए तैयार किए गए सिस्टम व्हिकल का कमांड मेजर विकास कुमार के हाथ में होगा।

युद्ध के मैदान में क्रांतिकारी बदलाव

संजय सिस्ट एक ऑटोमैटिक प्लेटफार्म है जो जमीनी और हवाई युद्धक्षेत्र सेंसर से डेटा को इंटीग्रेट करता है। यह सेंसर से प्राप्त इनपुट को वेरिफाई करके, उन्हें सुरक्षित आर्मी डेटा नेटवर्क और सैटेलाइट कम्युनिकेशन नेटवर्क के जरिए एक कॉमन सर्विलांस में बदल देता है। इससे युद्धक्षेत्र की पारदर्शिता बढ़ेगी और सेना को तेजी से निर्णय लेने में मदद मिलेगी। सिस्टम की यह क्षमता पारंपरिक ऑपरेशन्स में काफी मददगार साबित होगी।

लेफ्टिनेंट कर्नल श्रुतिका दत्ता का मानना है कि यह सिस्टम कमांडरों को नेटवर्क केंद्रित वातावरण में सटीक और प्रभावी रणनीति बनाने में सक्षम बनाएगी। यह भारतीय सेना के लिए एक गेम चेंजर साबित होगी।

पूर्णतया स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग

भारतीय सेना और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) ने इसे विकसित किया है। इस सिस्टम को 2,402 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। इसे मार्च 2025 से अक्टूबर 2025 तक तीन चरणों में सेना की सभी ऑपरेशनल ब्रिगेड, डिवीजनों और कोर में शामिल किया जाएगा।

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