Labour Day: कौन हैं असली मजदूर? डरावनी हैं लेबर डे से एक दिन पहले आईं ये तस्वीरें
1st May International Labour Day 2026 :

45°C की तपती धूप में भी काम
चिलचिलाती धूप और 45 डिग्री तापमान में जो बिना रुके लगातार काम करें वह मजूदर होते हैं। जिन्हें ना तो तपती दुपहरी बुरी लगती और ना ही तन से बहता हुआ उनका पसीना। बस उनको तो शाम तक इसका इंतजार होता है कि कब उनके उनकी मजदूरी के पैसे मिलें, जिससे वह और अपने परिवार का पेट भर सकें। इन्हें मजदूरों के अधिकारों के लिए 1 मई को मजदूर दिवस मनाया जाता है।
लेबर डे से पहले मजदूरों की हकीकत
यह तस्वीरें अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस की पूर्व संध्या पर, भारत में, विशेष रूप से पटना और जम्मू-कश्मीर से सामने आई हैं। जहां ईंट कारखानों में काम करने वाले मजदूर हैं। जिनमें पुरुष, महिलाएं बिना थके काम कर रहे हैं। उनको नहीं पता है कि कल 1 मई को उनके लिए मनाया जाने वाला लेबर डे है।
ईंट भट्ठों से आईं दर्दनाक तस्वीरें
बस यह मजदूर तो ईंटों को ढालने, ढोने और लादने जैसे शारीरिक श्रम में लगे हुए हैं, जो उनके दैनिक संघर्ष और समर्पण को दर्शाता है। क्योंकि इनको तो यह पता है कि इन्हें दिन के 12 से 16 घंटे तक मजदूरी करनी है।
सुबह से शाम तक मेहनत…
यह मजदूर सुबह की पहली किरण के साथ काम करते हैं और उसी सूरज के ढल जाने के बाद तक लगे रहते हैं। अगर मजदूर नहीं होते तो शायद यह देश इतनी तरक्की नहीं करता। क्योंकि यही लोग हैं जो शहरों की ऊंची इमारतों, बड़े-बड़े ब्रिड, सड़कों, फैक्ट्रियों और खेतों में दिन-रात मेहनत करते हैं जिससे हमारी रफ्तार नहीं ठहरती है।
देश की तरक्की के पीछे छिपा दर्द
बता दें कि भारत में 1923 में पहली बार चेन्नई में मजदूर दिवस मनाया गया था। तब से लेकर अब तक हर साल 1 मई को मजदूरों की मेहनत, संघर्ष और उनके अधिकारों की याद में यह मजदूर दिवस मनाया जाता है।
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