ओमान की खाड़ी में टैंकर ‘सेटेबेलो’ पर अमेरिकी सटीक हमले के बाद बड़ा रहस्य गहराया। 3 भारतीय नाविकों की मौत की पुष्टि, 21 बचाए गए। ईरान से तेल ले जाने के आरोप, MEA का कड़ा विरोध। अमेरिकी कार्रवाई और समुद्री तनाव ने उठाए गंभीर सवाल-क्या यह बड़ा भू-राजनीतिक टकराव है?
Oman Gulf Ship Attack: मध्य पूर्व (Middle East) के सुलगते समंदर से एक बेहद दर्दनाक और परेशान करने वाली खबर सामने आई है। ओमान की खाड़ी में कमर्शियल ऑयल टैंकर 'सेटेबेलो' (Settebello) पर अमेरिकी सेना द्वारा किए गए मिसाइल हमले के बाद लापता हुए तीन भारतीय नाविकों की मौत की आधिकारिक पुष्टि हो गई है। केंद्रीय शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने गुरुवार को इस दुखद घटना की जानकारी दी। इस खबर के आते ही न सिर्फ लापता नाविकों के परिवारों में कोहराम मच गया है, बल्कि भारत और अमेरिका के बीच एक बड़ा राजनयिक गतिरोध (Diplomatic Standoff) भी चरम पर पहुँच गया है।

रात का सन्नाटा और अमेरिकी फाइटर जेट का सटीक वार
यह पूरी खौफनाक दास्तान 9 जून की रात को शुरू हुई। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, रात ठीक 11:14 बजे ओमान की खाड़ी से गुजर रहे पलाऊ-ध्वज वाले कमर्शियल टैंकर 'M/T सेटेबेलो' को अमेरिकी रडार ने ट्रैक किया था।

अमेरिका का दावा है कि ईरान के खिलाफ जारी सख्त समुद्री नाकेबंदी के तहत इस टैंकर को रुकने और निर्देशों का पालन करने के लिए बार-बार चेतावनी दी गई थी। जब जहाज ने इन निर्देशों को कथित तौर पर नजरअंदाज किया, तो अमेरिकी लड़ाकू विमान ने उड़ान भरी और टैंकर के इंजन रूम में बेहद घातक सटीक हथियार (Precision Munitions) दाग दिए। मिसाइल लगते ही जहाज का इंजन रूम आग के गोले में तब्दील हो गया और चारों तरफ चीख-पुकार मच गई।

24 भारतीय क्रू मेंबर्स... समंदर के बीच मौत का वो मंजर
जिस समय अमेरिका ने इस कमर्शियल टैंकर को निशाना बनाया, उस समय इस पर कुल 24 भारतीय क्रू सदस्य सवार थे। मिसाइल ब्लास्ट के बाद जहाज पर अफरा-तफरी मच गई और वह समुद्र के बीच ही निष्क्रिय (Disabled) हो गया। घटना के तुरंत बाद एक बड़ा खोज और बचाव अभियान (Search and Rescue Operation) चलाया गया। इस रेस्क्यू ऑपरेशन के जरिए 21 भारतीय क्रू सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन तीन नाविक आग और पानी के बीच कहीं लापता हो गए थे। दो दिनों तक चली सस्पेंस और उम्मीदों से भरी तलाश के बाद आखिरकार गुरुवार को केंद्रीय मंत्री ने उनकी मौत की पुष्टि कर दी, जिससे पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है।
"निर्देशों का उल्लंघन या क्रूरता?" अमेरिका-ईरान जंग की कड़वी हकीकत
इस पूरे हमले के पीछे अमेरिका ने ईरान के साथ चल रहे अपने सीधे सैन्य संघर्ष को वजह बताया है। अमेरिकी सेना के अधिकारियों का कहना है कि यह तेल टैंकर अमेरिकी प्रतिबंधों और नाकेबंदी का खुला उल्लंघन करते हुए ईरान से तेल ले जा रहा था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड का तर्क: "हमने केवल अंतरराष्ट्रीय नियमों और अपनी नाकेबंदी को लागू करने के लिए यह कार्रवाई की क्योंकि जहाज हमारी चेतावनियों के बावजूद आगे बढ़ रहा था।" हालांकि, इस दलील ने भारत के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है, क्योंकि एक कमर्शियल जहाज पर इस तरह का जानलेवा हमला करना अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के तहत गंभीर सवाल खड़े करता है।

नई दिल्ली का कड़ा एक्शन: अमेरिकी दूत को किया गया तलब
तीन बेगुनाह भारतीय नाविकों की मौत और अपने नागरिकों की सुरक्षा को खतरे में देखकर भारत सरकार का गुस्सा फूट पड़ा है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है। राजनयिक स्तर पर कड़ा रुख अपनाते हुए विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (अमेरिका) नागराज नायडू ने नई दिल्ली में अमेरिका के चार्ज डी अफेयर्स (Chargé d’Affaires) जेसन मीक्स को तुरंत तलब किया। भारत ने अमेरिकी डिप्टी चीफ ऑफ मिशन के हाथ में एक कड़ा औपचारिक विरोध पत्र (Demarche) थमाया है। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि कमर्शियल जहाजों पर इस तरह के जानलेवा हमले किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं हैं और अमेरिका को अपने सहयोगियों के नागरिकों की सुरक्षा का हर हाल में सम्मान करना होगा। इस घटना ने खाड़ी क्षेत्र में व्यापार करने वाले भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर एक नया और गहरा सस्पेंस पैदा कर दिया है।


