Navratri 2026 : नवरात्रि के तीसरे दिन हरियाणा के अंबाला के दुखभंजन मंदिर में मां काली को 300 किलो दूध से स्नान कराया गया। मान्यता है कि सच्चे मन से यह अभिषेक करने पर घर में सुख-समृद्धि आती है।

अंबाला (हरियाणा) [ANI]: नवरात्रि के तीसरे दिन मंगलवार को अंबाला शहर के दुखभंजन मंदिर में एक अद्भुत नजारा दिखा। यहां भक्तों ने मां काली की मूर्ति को करीब 300 किलो दूध से स्नान कराया। लोग सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लेने के लिए इस खास अनुष्ठान में शामिल हुए। यह मंदिर की सदियों पुरानी परंपरा है। नवरात्रि का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित होता है। ऐसी मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से मां का दूध से अभिषेक करता है, उसके जीवन में हमेशा खुशहाली बनी रहती है।

अभिषेक के बाद कुछ दूध भक्तों को 'चरणामृत' के रूप में बांट दिया गया। बाकी बचे दूध से प्रसाद के लिए खीर बनी और लंगर में परोसे जाने वाले कढ़ी-चावल के लिए दही जमाया गया। शाम के समय मंदिर प्रशासन शहर में एक 'पालकी' यात्रा भी निकालेगा। इसके बाद बुधवार को मां की 'ताजपोशी' की रस्म पूरी की जाएगी।

मां को जो भी चढ़ाओ वह कई गुना करती हैं वापस

  • मंदिर के पुजारी पंकज वशिष्ठ ने इस रस्म के बारे में बताया। उन्होंने कहा, "हम मां को जो कुछ भी चढ़ाते हैं, वह हमें कई गुना वापस लौटाती हैं। आज दूध चढ़ाने के पीछे यही भाव है कि हमारे घर हमेशा अन्न, धन और सुख-समृद्धि से भरे रहें। आज मां पालकी में विराजमान होती हैं और अपनी पवित्र ज्योत साथ लेकर चलती हैं, जो इस बार अंबाजी से लाई गई है।"
  • पुजारी ने आगे बताया, "मां का मुकुट भी इस यात्रा में साथ रहता है। जो भी भक्त बुलावा भेजते हैं, पालकी उनके घर तक जाती है। आज का दिन बहुत शुभ है। 15 अक्टूबर को मंदिर के अंदर डांडिया महोत्सव का एक खास कार्यक्रम भी होगा।"

मां काली को दूध चढ़ाने से क्या होता है?

मान्यता है कि मां काली को दूध चढ़ाने से घर में सुख-समृद्धि, खुशहाली और अन्न-धन की वृद्धि होती है। मां के आशीर्वाद से कुछ ऐसा चमत्कार होता है या फिर आपका सालों बिगड़ा हुआ का काम पूरा हो जाता है। अंबाला के दुखभंजन मंदिर में भक्तों ने इसी आस्था के साथ मां काली का करीब 300 किलो दूध से अभिषेक किया।

आंध्र प्रदेश में अनोखी कलछी वाली माता

  • उधर, आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में भी नवरात्रि की धूम है। यहां इंद्रकीलाद्री पहाड़ी पर स्थित श्री कनक दुर्गा मंदिर में नवरात्रि के तीसरे दिन मां कनक दुर्गा को श्री अन्नपूर्णा देवी के रूप में सजाया गया।
  • श्री अन्नपूर्णा देवी को अन्न और पोषण की देवी माना जाता है। इस रूप में मां के एक हाथ में पवित्र अन्न का बर्तन और दूसरे में कलछी होती है। यह रूप बताता है कि मां ही दुनिया के सभी जीवों का पेट भरती हैं।
  • यहां भक्तों ने पूजा-अर्चना की और मां से सुख-शांति और कभी भूखा न रहने का आशीर्वाद मांगा। मंदिर में होने वाले सालाना दशहरा उत्सव में आंध्र प्रदेश और आस-पास के राज्यों से भारी भीड़ जुटती है। पूरे नवरात्रि यहां खास पूजा और अनुष्ठान चलते हैं।
  • आपको बता दें कि शारदीय नवरात्रि हिंदुओं का एक बहुत ही पवित्र और जीवंत त्योहार है। नौ रातों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा की नारी शक्ति की पूजा होती है।
  • अश्विन महीने में आने वाले इस त्योहार में लोग पूरे भक्ति-भाव से पूजा करते हैं और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। हर दिन मां के एक अलग रूप की पूजा होती है, जो शक्ति, दया और ज्ञान का प्रतीक है। इस दौरान भक्त व्रत रखते हैं, भजन गाते हैं और गरबा-डांडिया जैसे पारंपरिक डांस में हिस्सा लेकर जश्न मनाते हैं।