नासिक के फर्जी बाबा अशोक खरात केस में आए दिन नए खुलासे हो रहे हैं। अशोक खरात जैसे प्रभावशाली शख्स के खिलाफ जाने की हिम्मत किसी की नहीं थी, फिर उसके अश्लील वीडियो जनता के सामने लाकर उसकी पोल खोलने का काम आखिर किसने किया, जानते हैं। 

Fake Baba Ashok Kharat Case: नासिक के फर्जी ज्योतिष अशोक खरात के अश्लील वीडियो वायरल होने के बाद हड़कंप मचा हुआ है। इस केस में कई हाई-प्रोफाइल नेताओं के नाम भी सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि अशोक खरात के साथ महाराष्ट्र की पूर्व महिला अध्यक्ष रुपाली चाकणकर और उनकी बहन का भी कनेक्शन सामने आया है। इस केस में एक बड़ा मोड़ तब आया, जब खरात के अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे। सवाल सिर्फ यह नहीं है कि ये वीडियो कैसे वायरल हुए, बल्कि यह भी है कि डर और दबाव के माहौल में आखिर किसने हिम्मत दिखाकर सच्चाई को बाहर लाने का फैसला किया।

अशोक खरात के ऑफिस से कैसे लीक हुए वीडियो?

यह मामला दिखाता है कि अपराध का नेटवर्क चाहे कितना भी मजबूत क्यों न हो, उसके भीतर कहीं न कहीं कमजोरी जरूर होती है, जो समय आने पर सब कुछ उजागर कर देती है। इस केस में भी एक अंदरूनी शख्स ने ही पूरे नेटवर्क को सामने लाने का काम किया। नासिक के पुलिस कमिश्नर संदीप कर्णिक के मुताबिक, पुलिस के पास मौजूद वीडियो लीक नहीं हुए थे। असल में, अशोक खरात के ऑफिस में काम करने वाले एक कर्मचारी (ऑफिस बॉय) ने कुछ वीडियो अपने पास सुरक्षित रखे थे, जो बाद में सामने आए।

खरात का ऑफिस ब्वॉय बना अहम गवाह

जांच में सामने आया कि अशोक खरात का ऑफिस बॉय लंबे समय से वहां के कामकाज को देख रहा था और उसके कई आपत्तिजनक कामों का गवाह था। उसने कुछ वीडियो रिकॉर्ड कर अपने पास रख लिए थे और उन्हें एक जगह न रखकर अलग-अलग जगहों पर छुपाया। उसका मकसद साफ था कि जरूरत पड़ने पर खरात की सच्चाई सामने लाई जा सके।

खरात ने ऑफिस ब्वॉय की प्रेग्नेंट पत्नी से की अश्लील हरकत

इस मामले में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई। आरोप है कि खरात ने उसी ऑफिस बॉय की 7 महीने की गर्भवती पत्नी के साथ अश्लील हरकत की थी। इस घटना के बाद ऑफिस बॉय ने चुप रहने के बजाय सच सामने लाने का फैसला किया। उसने सबूत इकट्ठा किए और उन्हें सुरक्षित रखा। डर के माहौल के बावजूद उसने रणनीति बनाकर वीडियो अलग-अलग लोगों तक पहुंचाए, ताकि मामला दबाया न जा सके।

खुद को महादेव का अवतार बताता था भोंदू बाबा

पीड़ित महिलाओं के मुताबिक, अशोक खरात खुद को भगवान महादेव का अवतार बताता था और संबंध बनाने पर जीवन की समस्याएं खत्म करने का दावा करता था। मना करने पर वह परिवार के लोगों को नुकसान पहुंचाने की धमकी देकर दबाव बनाता था। खरात के खिलाफ कार्रवाई बेहद गोपनीय तरीके से की गई। उसके राजनीतिक संबंधों को देखते हुए ऑपरेशन की जानकारी केवल चुनिंदा अधिकारियों तक ही सीमित रखी गई थी। इस ऑपरेशन में सीएम देवेंद्र फडणवीस के अलावा कुछ उच्च अधिकारी शामिल थे। इसी रणनीति की वजह से बिना किसी लीक के आरोपी तक पहुंचना संभव हुआ और अंततः उसे गिरफ्तार कर लिया गया।