नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट में शामिल होने के सवाल पर BCCI ने अपनी 95वीं AGM में बड़ा खुलासा किया है। बोर्ड सेक्रेटरी के मुताबिक बीसीसीआई हर साल ₹3,000 करोड़ का टैक्स देता है। जानिए 27 अक्टूबर की सुनवाई से पहले क्या है पूरा मामला।
Supreme Court BCCI Tax: सुप्रीम कोर्ट (SC) की ओर से यह पूछे जाने के कुछ ही दिनों बाद कि बीसीसीआई को 'नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट' के दायरे से बाहर क्यों रखा जाना चाहिए, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने अपनी आर्थिक ताकत का ब्योरा सामने रख दिया है। बोर्ड ने साफ किया है कि वह सरकारी मदद पर नहीं चलता, बल्कि हर साल सरकारी खजाने में हजारों करोड़ रुपये का योगदान देता है।
BCCI Tax: हर साल ₹3,000 करोड़ टैक्स देता है बोर्ड
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने बताया है कि वह हर साल औसतन ₹3,000 करोड़ का इनकम टैक्स भरता है। बोर्ड के सेक्रेटरी देवजीत सैकिया ने यह जानकारी 18 सितंबर को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम परिसर में हुई BCCI की 95वीं सालाना आम बैठक (AGM) के बाद दी। सैकिया के मुताबिक, AGM में सदस्यों को बताया गया कि BCCI हर साल करीब ₹3,000 करोड़ टैक्स देता है। उन्होंने कहा कि इस जानकारी पर सदस्यों ने तालियां भी बजाईं। BCCI की यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है, जब उसके ऊपर नए Sports Act को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सवाल चल रहे हैं।
नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट: क्या है बोर्ड का रुख?
दरअसल, विवाद तब शुरू हुआ जब 2025 में पास हुए नए स्पोर्ट्स कानून से बीसीसीआई के बाहर रहने पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल खड़े किए। इस पर सफाई देते हुए सेक्रेटरी ने कहा कि बोर्ड कानून से बचने की कोई कोशिश नहीं कर रहा, बल्कि सही प्रक्रिया का इंतजार कर रहा है। सैकिया के मुताबिक, क्रिकेट अभी तक इस एक्ट के तहत 'डेज़िग्नेटेड स्पोर्ट' (मान्यता प्राप्त खेल) के रूप में अधिसूचित नहीं हुआ है।
Supreme Court BCCI: Sports Act के दायरे पर क्या सवाल?
सुप्रीम कोर्ट ने 9 सितंबर को BCCI और राज्य क्रिकेट संघों से पूछा था कि उन्हें National Sports Governance Act, 2025 के तहत क्यों नहीं लाया जाना चाहिए। अदालत ने यह भी पूछा था कि क्रिकेट संस्थाओं के पदाधिकारियों की सेवा शर्तें नए कानून के तहत क्यों नहीं आनी चाहिए। इस पूरे मामले में एक अहम मुद्दा यह है कि BCCI को अभी तक इस कानून के तहत 'Designated Sport' के तौर पर अधिसूचित नहीं किया गया है। BCCI का कहना है कि वह सरकारी ग्रांट पर निर्भर नहीं है और अपनी गतिविधियों से होने वाली कमाई से चलता है।
National Sports Governance Act: BCCI का क्या रुख?
देवजीत सैकिया ने कहा कि BCCI का Sports Act को लेकर रुख साफ है। उनके मुताबिक, पहले संबंधित अथॉरिटी को जरूरी प्रक्रिया पूरी करनी होगी और उसके बाद BCCI को Sports Act के तहत लाने के लिए अधिसूचना जारी करनी होगी। सैकिया ने कहा कि अधिसूचना जारी होते ही BCCI नए कानून के नियमों के मुताबिक कार्रवाई करेगा। फिलहाल बोर्ड का कहना है कि ऐसी कोई अधिसूचना जारी नहीं हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर BCCI अपना स्पष्टीकरण 27 अक्टूबर को देगा, जब मामला फिर सूचीबद्ध होगा। यानी फिलहाल मामला BCCI के Sports Act के दायरे में आने से ज्यादा उस प्रक्रिया और अधिसूचना पर टिका है, जिसके बाद कानून के प्रावधान बोर्ड पर लागू होंगे।


