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बीजिंग में बवाल: ट्रंप-शी मीटिंग में अमेरिकी रिपोर्टरों और सीक्रेट सर्विस के साथ बदसलूकी! Video
बीजिंग समिट में ट्रंप-शी मुलाकात के पीछे बढ़ा हाई-वोल्टेज तनाव! रिपोर्टरों को रोका गया, सीक्रेट सर्विस एजेंट पर बैन, मंदिर परिसर में सुरक्षा टकराव से US-China Relations पर उठे नए सवाल। ड्रैगन की सख्ती, जासूसी कैमरे और बंद दरवाज़ों के पीछे क्या हुआ?

Trump China Visit: बीजिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप (Donald Trump) और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) के बीच हुई हाई-प्रोफाइल बैठक केवल कूटनीतिक बातचीत तक सीमित नहीं रही। दो दिनों तक चले इस शिखर सम्मेलन के दौरान कई ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिन्होंने दुनिया की दो सबसे बड़ी शक्तियों के बीच मौजूद अविश्वास और बढ़ते सुरक्षा तनाव को उजागर कर दिया। मंच पर मुस्कुराहटें थीं, लेकिन पर्दे के पीछे हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे थे।

चीनी मीडिया की भीड़ और व्हाइट हाउस कर्मचारी के गिरने से मचा हंगामा
तनाव की पहली बड़ी घटना तब हुई जब द्विपक्षीय बैठक के दौरान चीनी मीडिया कर्मियों की भीड़ अचानक कार्यक्रम स्थल के अंदर घुस गई। अफरा-तफरी के बीच व्हाइट हाउस का एक अग्रिम कर्मचारी नीचे गिर पड़ा। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, कर्मचारी को हल्की चोटें आईं और वह कुछ समय तक सदमे में रहा। इस घटना के बाद अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने कड़ा विरोध दर्ज कराया और चीनी मीडिया टीम पर आक्रामक व्यवहार का आरोप लगाया। सूत्रों का कहना है कि इसी पल से दोनों देशों के सुरक्षा अधिकारियों के बीच माहौल बेहद असहज हो गया था।
US Secret Service and press are detained by Chinese agents in tense standoff. pic.twitter.com/ld7aCqEabG
— Daily Mail (@DailyMail) May 14, 2026
‘टेंपल ऑफ हेवन’ में 30 मिनट तक चला सुरक्षा गतिरोध
बीजिंग के ऐतिहासिक Temple of Heaven में हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए, जब चीनी सुरक्षा अधिकारियों ने अमेरिकी सीक्रेट सर्विस एजेंट को हथियार के साथ अंदर प्रवेश देने से इनकार कर दिया।
अमेरिकी पक्ष ने इसे राष्ट्रपति सुरक्षा प्रोटोकॉल का हिस्सा बताया, जबकि चीनी अधिकारियों ने स्थानीय नियमों का हवाला देते हुए हथियार जमा कराने की मांग की। लगभग 30 मिनट तक चले इस गतिरोध ने पूरे कार्यक्रम को रोक दिया। आखिरकार दूसरे एजेंट की मदद से प्रेस टीम को अंदर ले जाया गया, लेकिन पहला एजेंट बाहर ही खड़ा रहा। इस घटना ने साफ संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी अब सुरक्षा व्यवस्थाओं तक पहुंच चुकी है।
अमेरिकी पत्रकारों को रोका गया, काफिले तक दौड़कर पहुंचे रिपोर्टर
समिट के बाद स्थिति तब और बिगड़ गई जब अमेरिकी पत्रकारों को राष्ट्रपति काफिले तक पहुंचने से रोक दिया गया। रिपोर्टरों को एक कमरे में रोककर रखा गया और उनकी आवाजाही सीमित कर दी गई।
सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने इसे “अत्यधिक नियंत्रण” बताया और कहा कि अमेरिका कभी चीनी प्रेस के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करता। तनाव उस समय चरम पर पहुंच गया जब व्हाइट हाउस स्टाफ और पत्रकार सुरक्षा बैरिकेड्स पार कर तेजी से काफिले की ओर भागे, ताकि वे राष्ट्रपति दल से पीछे न रह जाएं।
पानी की बोतलें जब्त, बाथरूम तक पर रोक
अमेरिकी प्रेस कोर ने आरोप लगाया कि पूरे दौरे के दौरान उन पर असामान्य प्रतिबंध लगाए गए। रिपोर्ट्स के अनुसार, पत्रकारों को बार-बार रोका गया, उनकी पानी की बोतलें जब्त कर ली गईं और यहां तक कि कई जगहों पर बाथरूम उपयोग तक सीमित कर दिया गया। बीजिंग की गर्मी के बीच लगाए गए इन नियमों ने अमेरिकी मीडिया टीम में नाराज़गी और बेचैनी दोनों बढ़ा दी।
साइबर जासूसी के डर ने बढ़ाई चिंता
पूरे दौरे के दौरान अमेरिकी अधिकारियों ने अपने स्टाफ और पत्रकारों को ‘बर्नर फोन’ और अस्थायी ईमेल अकाउंट इस्तेमाल करने की सलाह दी। बीजिंग में जगह-जगह लगे निगरानी कैमरों और साइबर जासूसी की आशंकाओं ने इस दौरे को सामान्य कूटनीतिक यात्रा से कहीं ज्यादा संवेदनशील बना दिया। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह समिट केवल अमेरिका-चीन संबंधों की बातचीत नहीं थी, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन, निगरानी राजनीति और सुरक्षा अविश्वास का खुला प्रदर्शन भी बन गई।
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