Union Territories Amendment Bill 2026: केंद्र सरकार ने यूनियन टेरिटरीज लॉज (संशोधन) विधेयक 2026 पेश किया है, जिससे दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी में सीटों का बंटवारा, सीमांकन और महिलाओं के आरक्षण से जुड़े नियम बदलेंगे। जानिए इसका पूरा असर।
देश के चुनावी ढांचे को बदलने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। लोकसभा में यूनियन टेरिटरीज लॉज (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया गया है, जिसका सीधा असर दिल्ली, जम्मू और कश्मीर और पुडुचेरी की राजनीति पर पड़ेगा।
सरकार का कहना है कि संविधान में हाल के बदलावों के बाद पुराने कानून अब मौजूदा जरूरतों के हिसाब से फिट नहीं बैठ रहे थे, इसलिए उन्हें अपडेट करना जरूरी हो गया था।
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क्या है इस नए विधेयक का मकसद?
इस विधेयक का सबसे बड़ा फोकस तीन चीजों पर है:
- विधानसभा सीटों का नया बंटवारा
- चुनावी क्षेत्रों (Delimitation) का पुनर्गठन
- महिलाओं को आरक्षण लागू करने का रास्ता
अब सीटों का निर्धारण पुराने आंकड़ों से नहीं, बल्कि नई जनगणना के आधार पर होगा। इसके लिए एक स्वतंत्र आयोग बनाया जाएगा, जो तय करेगा कि किस इलाके में कितनी सीटें हों और उनकी सीमाएं क्या हों।
दिल्ली में क्या बदलने वाला है?
दिल्ली में फिलहाल 70 विधानसभा सीटें हैं। नए प्रस्ताव के मुताबिक, अब यह संख्या “कम से कम 70” कर दी गई है। यानी आने वाले समय में जनसंख्या बढ़ने के साथ सीटों की संख्या भी बढ़ाई जा सकती है। इसके अलावा, दिल्ली में चुनावी क्षेत्रों की सीमाएं नए सिरे से तय होंगी, ताकि तेजी से बढ़ती आबादी को सही प्रतिनिधित्व मिल सके।
जम्मू-कश्मीर में सीटें बढ़ने का रास्ता साफ
जम्मू और कश्मीर में भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। यहां विधानसभा सीटों की न्यूनतम संख्या 114 कर दी गई है। हालांकि, पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों के लिए 24 सीटें पहले की तरह खाली रहेंगी। नए सीमांकन के बाद ही अन्य बदलाव लागू किए जाएंगे, ताकि मौजूदा व्यवस्था पर अचानक असर न पड़े।
पुडुचेरी में भी होगा बदलाव
पुदुचेरी की विधानसभा में न्यूनतम 30 सीटें तय की गई हैं। इसके साथ ही नामित सदस्यों की संख्या बढ़ाकर 5 करने का प्रस्ताव है, जिनमें 2 महिलाएं होंगी। यह बदलाव भी सीमांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद लागू होगा।
महिलाओं के लिए आरक्षण: कब लागू होगा?
इस विधेयक का एक अहम हिस्सा महिलाओं को मिलने वाला आरक्षण है। संविधान के अनुसार, विधानसभा और लोकसभा में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित होंगी। लेकिन यह आरक्षण तभी लागू होगा जब नई जनगणना और सीमांकन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। यानी यह बदलाव तुरंत नहीं, बल्कि आने वाले समय में लागू होगा।
पुराने कानून हटेंगे, सिस्टम होगा आसान
सरकार ने इस विधेयक के जरिए कई पुराने प्रावधानों को खत्म करने का प्रस्ताव रखा है, जो अब समय के हिसाब से अप्रासंगिक हो चुके हैं। इससे कानून को सरल और स्पष्ट बनाने की कोशिश की गई है, ताकि चुनावी प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और व्यवस्थित हो सके।
आगे क्या असर होगा?
इस विधेयक के लागू होने के बाद:
- विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ सकती है
- चुनावी क्षेत्रों की सीमाएं बदलेंगी
- महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ेगी
हालांकि, ये सभी बदलाव एक साथ लागू नहीं होंगे। नई जनगणना और सीमांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन्हें चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
क्यों अहम है यह कदम?
यह विधेयक सिर्फ तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि देश के चुनावी सिस्टम को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर है कि यह विधेयक कब पास होता है और इसके लागू होने के बाद राज्यों की राजनीति में क्या बदलाव देखने को मिलते हैं।
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