बिहार में रील बनाने के लिए ट्रेनों पर पत्थरबाजी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पुलिस ने 12 जिलों को हॉटस्पॉट चिन्हित किया है। 5 दिन में 134 लोग गिरफ्तार हुए, जिनमें 40 नाबालिग हैं। Vande Bharat समेत कई ट्रेनें निशाने पर हैं।
पटना: सोशल मीडिया पर कुछ सेकंड की वायरल रील के लिए अब ट्रेनों को निशाना बनाने का खतरनाक ट्रेंड सामने आया है। बिहार में वंदे भारत, तेजस और जन शताब्दी जैसी ट्रेनों पर पत्थर फेंकने के मामले सामने आने के बाद पुलिस ने ऐसे 12 जिलों को हॉटस्पॉट के तौर पर चिह्नित किया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पूछताछ में कई आरोपियों ने कथित तौर पर रील और वीडियो बनाने के लिए यह हरकत करने की बात स्वीकार की है। पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर चलाए गए विशेष अभियान में पिछले 5 दिनों में 134 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें 40 नाबालिग भी शामिल हैं। आधुनिक ट्रेनों में लगे कैमरों की मदद से कई संदिग्धों की पहचान की गई।
बिहार के इन 12 जिलों में सबसे ज्यादा खतरा
पुलिस मुख्यालय ने पटना समेत भोजपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय, बेतिया, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, नालंदा, सारण, गया, वैशाली और नवादा को ट्रेन पर पत्थरबाजी के हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नित किया है। अब इन इलाकों में RPF और GRP को अतिरिक्त निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। खासतौर पर उन स्थानों पर नजर रखी जाएगी जहां पहले ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
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छुट्टी के दिन बढ़ती है पत्थरबाजी
पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेन पर पत्थर फेंकने की घटनाएं अप्रैल में सबसे ज्यादा दर्ज की गई थीं। इसके अलावा शनिवार और रविवार जैसे छुट्टी के दिनों में भी ऐसे मामलों में बढ़ोतरी देखी गई। जांच के दौरान पुलिस के सामने यह बात आई कि कुछ लोग ट्रेन गुजरने के समय पत्थरबाजी कर उसका वीडियो रिकॉर्ड करते थे। यही वीडियो बाद में सोशल मीडिया रील के तौर पर इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।
एक रील की कीमत पड़ सकती है भारी
ट्रेन पर फेंका गया एक पत्थर सिर्फ रेलवे की संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि खिड़की से टकराकर यात्रियों को गंभीर चोट भी पहुंचा सकता है। तेज रफ्तार ट्रेन के सामने इस तरह की हरकत हादसे का कारण बन सकती है। पुलिस ने साफ किया है कि सोशल मीडिया कंटेंट बनाने के नाम पर रेलवे और यात्रियों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।
ऐसे मामलों में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और यात्रियों की जान-माल को खतरे में डालने जैसे आरोपों में कार्रवाई हो सकती है, जिनमें तीन से सात साल तक की सजा का प्रावधान बताया गया है। अब बिहार पुलिस की चुनौती सिर्फ पत्थरबाजी रोकना नहीं, बल्कि उस मानसिकता पर लगाम लगाना है जिसमें कुछ सेकंड की वायरल रील के लिए सैकड़ों यात्रियों की जिंदगी दांव पर लगा दी जाती है।
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