बसपा में आकाश आनंद को नेशनल कोऑर्डिनेटर पद से हटाए जाने के बाद उनके छोटे भाई ईशान आनंद पहली बार राष्ट्रीय कार्यकारिणी के बड़े मंच पर नजर आए। क्या मायावती BSP में नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं? जानिए पूरी कहानी।

बहुजन समाज पार्टी की राजनीति में एक तस्वीर ने नई चर्चा छेड़ दी है। एक तरफ मायावती के भतीजे आकाश आनंद को नेशनल कोऑर्डिनेटर के पद से हटा दिया गया, वहीं दूसरी तरफ उनके छोटे भाई ईशान आनंद पहली बार पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बड़े और आधिकारिक मंच पर नजर आए। अब सवाल उठ रहा है कि क्या BSP में नई पीढ़ी को लेकर कोई नई रणनीति तैयार हो रही है?

लखनऊ में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में मायावती मंच पर मौजूद थीं। उनके भाई आनंद कुमार के साथ ईशान आनंद भी बैठे दिखाई दिए। नीला पटका पहने ईशान की मौजूदगी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई, खासकर इसलिए क्योंकि इसी महत्वपूर्ण बैठक में आकाश आनंद नजर नहीं आए।

आकाश आनंद की राजनीति में फिर आया उतार-चढ़ाव

आकाश आनंद का BSP में राजनीतिक सफर लगातार बदलावों से भरा रहा है। 10 दिसंबर 2023 को मायावती ने उन्हें पार्टी का नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाया था और राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर भी आगे बढ़ाया था। लेकिन कुछ ही महीनों बाद मई 2024 में उन्हें बड़ी जिम्मेदारियों से हटा दिया गया। बाद में उनकी वापसी हुई, मगर मार्च 2025 में उन्हें फिर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से दूर कर दिया गया।

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2026 में आकाश ने एक बार फिर सक्रिय राजनीति में वापसी की और यूपी विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच हाथरस और नोएडा में रैलियां भी कीं। हालांकि, अब मायावती ने उन्हें फिर नेशनल कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी से हटा दिया है। पार्टी नेतृत्व का संकेत है कि आकाश को अभी राजनीतिक रूप से और अनुभव हासिल करने की जरूरत है।

पहली बार बड़े मंच पर ईशान आनंद

इस बीच ईशान आनंद की सक्रियता बढ़ती नजर आ रही है। लंदन की वेस्टमिंस्टर यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई कर चुके ईशान पहले भी मायावती के जन्मदिन और कुछ संगठनात्मक कार्यक्रमों में दिखाई दे चुके हैं। लेकिन राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के आधिकारिक मंच पर उनकी मौजूदगी को अलग राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। चर्चा है कि पार्टी युवा विंग को लेकर कोई बड़ा फैसला कर सकती है और ईशान को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल सकती है।

क्या ईशान होंगे मायावती के उत्तराधिकारी?

फिलहाल इस सवाल का जवाब देना जल्दबाजी होगी। मायावती पहले साफ कह चुकी हैं कि उनके जीते-जी कोई उत्तराधिकारी नहीं होगा। हालांकि, BSP की राजनीति में हर संगठनात्मक फैसला और मंच पर दिखाई देने वाला चेहरा राजनीतिक संदेश जरूर देता है। एक तरफ आकाश आनंद फिलहाल बड़ी जिम्मेदारी से दूर हैं, दूसरी तरफ ईशान आनंद की मौजूदगी बढ़ रही है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां तेज हो रही हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि ईशान आनंद को आगे लाना सिर्फ युवा वोटरों तक पहुंचने की रणनीति है या BSP की राजनीति में किसी बड़े बदलाव की शुरुआत? इसका जवाब आने वाले दिनों में पार्टी के फैसलों से साफ होगा।

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