भारत देश की आजादी के दशकों बाद जनगणना का वो पन्ना खुलने जा रहा है जो अब तक छिपा हुआ था। Census 2027 में जाति से लेकर आधार, मोबाइल और बैंक अकाउंट तक की जानकारी! जानिए जनगणना के 40 सवालों में क्या-क्या पूछा जाएगा और पहली डिजिटल जनगणना में क्या बदलेगा?
नई दिल्ली: स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार एक ऐसा सामाजिक और जनसांख्यिकीय महासर्वे होने जा रहा है, जो देश के हर नागरिक से जुड़े कई अनसुलझे सवालों के जवाब सामने लाएगा। केंद्र सरकार ने आगामी जनगणना-2027 (Census 2027) के लिए 40 बहुआयामी प्रश्नों की विस्तृत सूची आधिकारिक तौर पर जारी कर दी है। इस बार की जनगणना महज एक आबादी का आंकड़ा नहीं होगी, बल्कि यह देश के सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने की नई तस्वीर पेश करेगी।
आजादी के बाद का सबसे बड़ा बदलाव: सवाल नंबर 10 में छिपा क्या है?
इस पूरी प्रश्नावली में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला पड़ाव सवाल नंबर 10 है। 1947 में आजादी मिलने के बाद यह पहला मौका होगा जब देश के सभी समुदायों की जातिगत जानकारी एक साथ दर्ज की जाएगी। इससे पहले 2011 की जनगणना में केवल अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की ही क्रमबद्ध गिनती की जाती थी। कैबिनेट कमेटी ऑन पॉलिटिकल अफेयर्स (CCPA) द्वारा लिए गए इस दूरगामी फैसले के तहत अब हर नागरिक से उसकी जाति, धर्म, नाम, आयु, वैवाहिक स्थिति और परिवार के मुखिया से संबंध के बारे में सीधी जानकारी ली जाएगी।
शिक्षा, रोजगार से लेकर डिजिटल साक्षरता: आपकी जिंदगी के हर पहलू का हिसाब
सरकार द्वारा तैयार किए गए 40 सवालों का दायरा बेहद व्यापक है। इस महासर्वे में नागरिकों की केवल शैक्षणिक योग्यता ही नहीं, बल्कि उनकी डिजिटल साक्षरता (Digital Literacy) और बोली जाने वाली भाषाओं व मातृभाषा का विवरण भी दर्ज होगा। इसके साथ ही, रोजगार के मोर्चे पर नागरिक क्या काम करते हैं, किस उद्योग या सेवा क्षेत्र से जुड़े हैं, और क्या वे नए रोजगार की तलाश में हैं, जैसे सवालों से देश की वास्तविक आर्थिक स्थिति का खाका तैयार किया जाएगा। महिलाओं से उनके जीवित बच्चों की संख्या और प्रवासन (Migration) से जुड़े कारणों का भी विस्तृत ब्योरा लिया जाएगा।
आईडी प्रूफ और कोविड वैक्सीन: पहचान और सेहत का पूरा रिकॉर्ड
इस बार की प्रश्नावली में कुछ ऐसे आधुनिक सवाल शामिल किए गए हैं जो पहली बार किसी जनगणना का हिस्सा बन रहे हैं:
- टीकाकरण का ब्योरा: कोविड-19 वैक्सीन किस स्थान पर लगवाई गई।
- वित्तीय एवं व्यक्तिगत पहचान: बैंक खातों की संख्या, मोबाइल नंबर, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस की उपलब्धता।
- सरकारी दस्तावेज: आधार नंबर और वोटर आईडी कार्ड से जुड़ी जानकारी।
दो चरणों का चक्रव्यूह: कब और कैसे पहुंचेगा प्रगणक आपके द्वार?
देश की यह पहली डिजिटल जनगणना दो मुख्य चरणों में पूरी की जाएगी:
- 1. पहला चरण (हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस): यह प्रक्रिया अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच आयोजित की जाएगी। इसमें मकानों की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और आवासीय संसाधनों की मैपिंग होगी। इसके तहत नागरिकों को 15 दिनों का सेल्फ-एन्यूमरेशन (Self-Enumeration) का विकल्प भी मिलेगा।
- 2. दूसरा चरण (पॉपुलेशन एन्यूमरेशन): यह मुख्य चरण फरवरी 2027 में संचालित होगा, जिसमें जातिगत आंकड़ों समेत सभी सामाजिक-आर्थिक डेटा दर्ज किए जाएंगे। हालांकि, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फबारी वाले कठिन क्षेत्रों में यह दूसरा चरण सितंबर 2026 में ही पूरा कर लिया जाएगा।
गोपनीयता की अभेद्य दीवार: क्या सुरक्षित रहेगा आपका डेटा?
इतने व्यापक व्यक्तिगत और पहचान संबंधी डेटा के संग्रह को लेकर गोपनीयता का सवाल उठना लाजमी है। हालांकि, केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि Census Act, 1948 की धारा 15 के तहत नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। इसे न तो सार्वजनिक किया जा सकता है, न ही आरटीआई (RTI) के तहत मांगा जा सकता है, और न ही किसी अदालत में सबूत के रूप में पेश किया जा सकता है।
₹11,718 करोड़ से ज्यादा खर्च
केंद्र सरकार ने Census 2027 के लिए ₹11,718.24 करोड़ के बजट को मंजूरी दी है। यानी अगली जनगणना सिर्फ जातिगत आंकड़ों के लिहाज से ही नहीं, बल्कि डिजिटल प्रक्रिया और डेटा संग्रह के तरीके से भी देश के लिए एक बड़ा बदलाव साबित होने वाली है।


