POCSO Act Special Court: चेन्नई के 84 साल के बिजनेसमैन पर पॉक्सो (POCSO) मामले में 9 और नाबालिग बच्चियों ने यौन शोषण के आरोप लगाए हैं। इसके बाद तमिलनाडु के सीएम सी जोसेफ विजय ने पुलिस को जांच तेज करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
CM Vijay POCSO case: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने 84 साल के एक बिजनेसमैन से जुड़े पॉक्सो (POCSO) मामले में पुलिस को जांच तेज करने का निर्देश दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि इस मामले से जुड़े किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाना चाहिए।
और पीड़िताओं के सामने आने पर CM ने दिए जांच के आदेश
यह सख्त कदम तब उठाया गया, जब 9 और नाबालिग बच्चियों ने सामने आकर बयान दिया। इन बच्चियों का आरोप है कि इस बिजनेसमैन ने उनका भी यौन शोषण किया है। पिछले हफ्ते ही मुख्यमंत्री ने पुलिस के आला अधिकारियों को तलब किया था। उन्होंने खुद इस जांच की प्रोग्रेस रिपोर्ट देखी। सीएम विजय ने पुलिस को निर्देश दिया है कि मामले की हर एंगल से जांच हो, इसमें शामिल सभी लोगों की पहचान की जाए और उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाए।
वीडियो में दिख रही नाबालिग बच्चियों की पहचान करने के लिए महिला पुलिस सब-इंस्पेक्टरों की एक स्पेशल टीम भी बनाई गई है।
जांच की डिटेल्स और गिरफ्तारियां
इससे पहले, चेन्नई सिटी पुलिस ने खुलासा किया था कि मूल शिकायतकर्ता के अलावा इस बिजनेसमैन ने 7 और नाबालिग बच्चियों का कथित तौर पर यौन शोषण किया है। एक सीनियर पुलिस अफसर ने बताया कि इन सातों पीड़िताओं की पहचान कर ली गई है। मद्रास हाईकोर्ट में पॉक्सो (POCSO) एक्ट, 2012 के मामलों की विशेष अदालत के सामने उनके बयान भी दर्ज कर लिए गए हैं।
आरोपी बिजनेसमैन को 29 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस को एक यूएसबी (USB) ड्राइव मिली थी, जिसमें एक वीडियो क्लिप था। इस वीडियो में तेनाम्पेट (Teynampet) स्थित उसके गेस्ट हाउस में एक नाबालिग बच्ची के साथ कथित तौर पर ज्यादती करते हुए दिखाया गया था। इसी के बाद यह मामला दर्ज हुआ।
जेल में ही हो रही आरोपी से पूछताछ
पॉक्सो की विशेष अदालत की जज पद्मा षणमुगसुंदरम ने पूछताछ के लिए आरोपी की तीन दिन की कस्टडी मंजूर की है। उसकी उम्र और सेहत को देखते हुए, सेंट्रल क्राइम ब्रांच का एंटी-वाइस स्क्वॉड 20 सितंबर तक पुझल (Puzhal) जेल के अंदर ही उससे पूछताछ कर रहा है। यह पूछताछ सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक वीडियो रिकॉर्डिंग के जरिए हो रही है।
उसे दो अन्य आरोपियों के साथ गिरफ्तार किया गया था। जांच में पता चला कि एक पीड़िता अनुसूचित जाति (SC) समुदाय से है, इसलिए मामले में एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम भी जोड़ दिया गया है।
अदालत ने खारिज कर दी थी पुलिस की शुरुआती रिपोर्ट
शुरुआत में पुलिस ने यह कहते हुए केस बंद करने की कोशिश की थी कि वीडियो में दिख रहे लोगों की पहचान नहीं हो पा रही है। लेकिन अदालत ने इस क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया और आगे की जांच के आदेश दिए। इसके बाद एसीपी राजलक्ष्मी के नेतृत्व में एक स्पेशल टीम बनाई गई। इस टीम ने साबित किया कि 2019 में जब यह अपराध हुआ था, तब पीड़िता नाबालिग थी।
