Abhijeet Dipke: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता अभिजीत दिपके ने दिल्ली पुलिस पर हिरासत के दौरान मानसिक प्रताड़ना का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पुलिस ने रात के 3:30 बजे उनसे जबरन कागजात पर साइन कराने की कोशिश की और उनकी दादी के निधन का झूठा बहाना बनाया।
हिंगोली (महाराष्ट्र): कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सदस्य अभिजीत दिपके ने सोमवार को दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में हिरासत के दौरान पुलिस ने उन्हें और उनके परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। डिपके ने पुलिस की इस कार्रवाई को उन पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की एक सोची-समझी साजिश बताया।
दिपके ने बताया कि कैसे आधी रात को उन पर दस्तावेजों पर साइन करने का दबाव डाला गया। उन्होंने पुलिस के उस दावे को भी 'झूठ' बताया जिसमें कहा गया था कि उनकी दादी का निधन हो गया है। दिपके के मुताबिक, यह सब उनसे जबरन कबूलनामा लेने के लिए किया गया था।
रात 3 बजे माता-पिता को फोन करने को कहा…
दिपके ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "यह सरासर झूठ है! वे बस खुद को सही साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। रात 3:30 बजे वे मेरे पास अरेस्ट पेपर लेकर आए और बोले, 'तुम्हारी दादी का निधन हो गया है, हम नहीं चाहते कि तुम यहां रहो, इसलिए इस अरेस्ट पेपर पर साइन कर दो।' मैंने साइन करने से साफ मना कर दिया। फिर उन्होंने कहा कि मुझे साइन करना ही होगा और अपने माता-पिता को फोन करना चाहिए। मैंने उनसे पूछा, 'मैं रात 3:30 बजे अपने माता-पिता को फोन क्यों करूं?' उन्होंने मुझे पूरा दिन हिरासत में रखा। मुझे यह तक नहीं बताया गया कि मैं कहां हूं, किस पुलिस स्टेशन में हूं या देश के किस हिस्से में हूं। मुझे, मेरे माता-पिता और मेरे वकीलों को कुछ नहीं पता था। उन्होंने पूरा दिन किसी को कोई जानकारी नहीं दी। और रात 3:30 बजे वे जानबूझकर चाहते थे कि मैं अपने माता-पिता को फोन करके उन्हें परेशान करूं। वे चाहते थे कि मैं उन्हें यह झटका दूं कि मैं लंबे समय तक जेल में रहने वाला हूं। दिल्ली पुलिस सिर्फ मुझे ही नहीं, बल्कि मेरे परिवार को भी मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही थी। क्या दिल्ली पुलिस ने मेरे परिवार को बताया कि मुझे कहां रखा गया है? क्या उन्होंने मेरे माता-पिता को बताया कि मैं किस जेल या पुलिस स्टेशन में हूं? अगर नहीं बताया, तो क्यों नहीं बताया? क्या उनमें इंसानियत नहीं बची है?"
प्लेन से दिपके को किया किडनैप
- दिपके ने उन कागजातों पर साइन करने से भी इनकार कर दिया, जिनमें उन पर शांति भंग करने का आरोप लगाया गया था। उनका कहना था कि यह पूरी प्रक्रिया उन्हें बिना किसी कानूनी मदद के फंसाने की एक चाल थी।
- दिपके ने आगे कहा, "वे मुझसे इस पेपर पर साइन करने को कह रहे थे और दावा कर रहे थे कि इसमें लिखा है कि मैं विरोध प्रदर्शन करके देश की शांति भंग कर रहा था। मैंने उनसे पूछा, 'आपने मुझे प्रदर्शन करने की इजाजत कब दी? आपने तो मुझे सीधे प्लेन से उठा लिया, मैं इस पेपर पर साइन नहीं करूंगा।' उन्होंने कहा कि मुझे साइन करना ही पड़ेगा। मैंने साफ कह दिया, 'आप मुझे इस तरह फंसा नहीं सकते। मैं एक पढ़ा-लिखा इंसान हूं, जब तक मेरा वकील नहीं आ जाता, मैं किसी भी कागज पर साइन नहीं करूंगा।'"
- CJP के संस्थापक ने केंद्र सरकार पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलकर कुछ खास अधिकारियों को बचाने के लिए सरकारी मशीनरी का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है।
1 साल भी जेल में रखें तब नहीं हटेंगे पीछे
दिपके ने कहा, "हम लंबे समय से पुलिस से यह पूछ रहे हैं। वे बार-बार कहते हैं कि परमिशन नहीं है। तो आज हमें बता दीजिए कि आप प्रदर्शन की इजाजत कब देंगे। अगर आप आज नहीं बताएंगे, तो हम खुद तारीख का ऐलान करेंगे। और अगर दिल्ली पुलिस हमें गिरफ्तार करना चाहती है, तो शौक से करे। मैं पीछे हटने वाला नहीं हूं। आप हमें 10 दिन, एक महीना या एक साल तक अंदर रखें, हम पीछे नहीं हटेंगे। अब बहुत हो गया है, पूरा देश तानाशाही के साये में है। सिर्फ एक ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए उन्होंने पत्रकारों को गिरफ्तार किया है, छात्रों को हिरासत में लिया है और उन्हें पीट रहे हैं। उन्होंने विपक्षी सांसदों को पीटा है; कल ही सांसद जॉन ब्रिटास को बुरी तरह पीटा गया। एक ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए नरेंद्र मोदी और अमित शाह गुंडागर्दी पर उतर आए हैं। अगर वे गुंडागर्दी करना चाहते हैं, तो करें, लेकिन हम महात्मा गांधी और डॉ. अंबेडकर के रास्ते पर चलने वाले लोग हैं। उन्होंने देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी थी, और हम इस तानाशाही को खत्म करने के लिए लड़ेंगे।"


