Sonam Wangchuk Warning: सोनम वांगचुक ने CJP नेताओं की गिरफ्तारी को 'अघोषित आपातकाल' बताया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि रविवार तक रिहाई न होने पर वे आमरण अनशन करेंगे।
CJP Protest Delhi Update: दिल्ली में शनिवार का दिन काफी गहमागहमी वाला रहा। मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने बड़ा एक्शन लेते कई जाने-माने चेहरों को हिरासत में ले लिया। कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को सुबह ही एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया। इसके बाद तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों और कई अन्य बड़े चेहरों को भी गिरफ्तार किया गया। जिसके बाद प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) का गुस्सा खुलकर सामने आया है। उन्होंने देश के मौजूदा हालात को 'अघोषित आपातकाल' (Undeclared Emergency) बताते हुए पुलिस और सरकार को चेतावनी दी है कि अगर रविवार तक गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों की रिहाई नहीं होती है, तो वे आमरण अनशन करेंगे।
दिल्ली में क्या हुआ?
चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) और अन्य संगठनों ने 10 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन बुलाया। इस प्रोटेस्ट से पहले दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम करते हुए पूरे इलाके को किले में तब्दील कर दिया और ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां कीं। पुलिस के इस सख्त एक्शन ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस दौरान कई प्रमुख नेताओं, एक्टिविस्ट्स और सोशल मीडिया क्रिएटर्स को हिरासत में लिया गया है, जिनमें फेमस यूट्यूबर ध्रुव राठी, एक्टिविस्ट योगेंद्र यादव, सीनियर वकील प्रशांत भूषण, सीजेपी नेता अभिजित दिपके, सौरभ दास, आशुतोष रांका, CPI(ML) के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य और AISA प्रेसीडेंट नेहा बोरा जैसे नाम शामिल हैं।
सोनम वांगचुक ने क्या चेतावनी दी?
इस पूरी कार्रवाई के बाद सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक वीडियो शेयर करते हुए कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने लिखा कि 'जब शांति और एकता बनाए रखने की अपील की थी, तब कभी नहीं सोचा था कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में ऐसा अघोषित आपातकाल देखने को मिलेगा। अगर रविवार तक सभी गिरफ्तार लोगों को रिहा नहीं किया गया, तो मैं मजबूरन आमरण अनशन या पदयात्रा मार्च शुरू करूंगा।'
सोनम वांगचुक प्रदर्शन में क्यों शामिल नहीं हुए?
इससे पहले 10 अक्टूबर को हुए इस प्रदर्शन में सोनम वांगचुक नहीं शामिल हुए। उन्होंने इसकी वजह बताते हुए कहा था कि वे इन दिनों ऊंचे हिमालयी इलाकों में सर्दियों की तैयारियों और पानी की सुरक्षा (Water Security) से जुड़े कामों में व्यस्त हैं। उन्होंने मशहूर शायर फैज अहमद फैज की पंक्तियों को याद करते हुए कहा था, 'और भी गम हैं जमाने में सियासत के सिवा...' यानी राजनीति के अलावा भी जीवन और प्रकृति से जुड़ी कई और बड़ी जिम्मेदारियां हैं। इससे पहले वांगचुक ने जुलाई महीने में परीक्षा में गड़बड़ी के खिलाफ जंतर-मंतर पर 26 दिन का लंबा उपवास रखा था, जिसे केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी में खत्म किया गया था।


