Trump Putin Talks: रूस ने अमेरिकी कैदी को 7 साल बाद रिहा कर दिया। ट्रंप ने दावा किया कि बदले में कुछ नहीं दिया गया, लेकिन प्रतिबंधों को लेकर उनके बयान ने सवाल खड़े कर दिए।
US Russia Prisoner Release: रूस की जेल में करीब 7 साल बिताने के बाद अमेरिकी नागरिक स्टीफन हबर्ड की रिहाई हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि रूस ने इस रिहाई के बदले अमेरिका से कुछ नहीं मांगा। लेकिन इसके बाद रूस पर प्रतिबंधों को लेकर ट्रंप के बयान ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने साफ कर दिया है कि उनका देश अपनी जमीन रूस को नहीं सौंपेगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या हबर्ड की रिहाई के पीछे सिर्फ ट्रंप और पुतिन की बातचीत थी या रूस-अमेरिका के बीच चल रही बड़ी बातचीत का भी इसमें कोई रोल था?
करीब 7 साल बाद रूसी जेल से बाहर आए स्टीफन हबर्ड
74 साल के स्टीफन हबर्ड अमेरिका के मिशिगन के रहने वाले रिटायर्ड टीचर हैं। रूस ने उन्हें 2024 में जेल भेजा था। उन पर यूक्रेन की तरफ से लड़ने का आरोप लगाया गया था। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार को उनकी रिहाई की जानकारी दी। पुतिन के मुताबिक, हबर्ड को सेंट पीटर्सबर्ग के एयरपोर्ट ले जाया गया। यह ऐलान उस समय हुआ, जब पुतिन की अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ बैठक चल रही थी।
ट्रंप बोले- रूस ने बदले में कुछ नहीं मांगा
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'Truth Social' पर बताया कि उन्होंने पिछले हफ्ते पुतिन से फोन पर बात करते समय हबर्ड की रिहाई का मुद्दा उठाया था। ट्रंप के मुताबिक, रूस ने उनकी बात का सम्मान करते हुए हबर्ड को रिहा कर दिया और इसके बदले अमेरिका को कुछ भी नहीं देना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में कैदियों की अदला-बदली जैसी कोई डील नहीं हुई। लेकिन ट्रंप के अगले बयान ने इस मामले को नया मोड़ दे दिया।
रूस पर प्रतिबंधों का जिक्र क्यों करने लगे ट्रंप?
हबर्ड की रिहाई के बाद ट्रंप ने कहा कि कुछ लोग रूस पर तुरंत नए प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे थे। उनके मुताबिक, अब उन लोगों ने यह जानने के बाद माफी मांगी कि हबर्ड की रिहाई के लिए बातचीत चल रही थी। ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर उस समय रूस पर प्रतिबंध लगा दिए जाते, तो रिहाई को लेकर चल रही बातचीत पूरी तरह रुक सकती थी। यहीं से सवाल उठने लगे कि जब रूस ने बदले में कुछ नहीं मांगा, तो प्रतिबंधों का बातचीत से क्या संबंध था?
रूस-अमेरिका की बातचीत में यूक्रेन युद्ध भी शामिल
हबर्ड की रिहाई के बीच रूस और अमेरिका के बीच दूसरी अहम बातों पर भी चर्चा हुई। इनमें रूसी डीजल से जुड़ा समझौता भी शामिल है। इस व्यवस्था को लेकर यूक्रेन और उसके सहयोगियों ने चिंता जताई है, क्योंकि इससे रूस पर प्रतिबंधों में ढील मिलने का सवाल उठ रहा है। अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ ने डीजल समझौते के लिए पुतिन का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि फ्यूल की बढ़ती कीमतों के बीच यह व्यवस्था अमेरिकी किसानों और ट्रक ड्राइवरों के लिए अहम है। विटकॉफ ने ये भी कहा कि यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ नॉर्वे में हुई बातचीत के बाद सीजफायर की दिशा में आगे बढ़ने का आधार बना है। उन्होंने रूस, यूक्रेन और अमेरिका के बीच तीनों देशों की बातचीत फिर शुरू करने की अपील भी की।
जेलेंस्की ने कहा- जमीन नहीं छोड़ेंगे
रूस और अमेरिका के बीच बातचीत के दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने अपने देश की जमीन को लेकर साफ रुख रखा है। Fox News को दिए इंटरव्यू में जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए अपने पूर्वी इलाकों को रूस के हवाले नहीं करेगा। उन्होंने रूस पर आरोप लगाया कि वह आम लोगों को निशाना बनाकर ड्रोन और मिसाइल हमले कर रहा है, ताकि यूक्रेन पर जमीन छोड़ने का दबाव बनाया जा सके। जेलेंस्की ने मौजूदा मोर्चों पर तुरंत सीजफायर करने और उसके बाद बातचीत के जरिए स्थायी शांति का रास्ता निकालने की मांग की। दूसरी तरफ, रूस पहले भी सीजफायर की मांगों को खारिज करता रहा है। मॉस्को की मांग है कि यूक्रेन डोनबास के उन इलाकों को छोड़ दे, जिन पर रूस का कुछ हिस्सा कब्जा कर चुका है। यूक्रेन इस मांग को स्वीकार करने से इनकार करता है।
क्या ट्रंप-पुतिन के बीच कोई सीक्रेट डील हुई?
स्टीफन हबर्ड की रिहाई के बदले अमेरिका ने कुछ दिया या नहीं, इस पर ट्रंप का दावा साफ है। लेकिन रूस पर प्रतिबंधों को लेकर उनका बाद का बयान बातचीत के दूसरे पहलुओं पर सवाल जरूर खड़े करता है। फिलहाल ऐसी किसी सीक्रेट डील की आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। इतना जरूर है कि हबर्ड की रिहाई के साथ रूस-अमेरिका के संबंधों, प्रतिबंधों और यूक्रेन में सीजफायर को लेकर बातचीत फिर चर्चा में आ गई है।









