Jantar Mantar Facts : दिल्ली के जंतर-मंतर की आज चर्चा देश ही नहीं विदेश तक हो रही है। क्योंकि सोनम वांगचुक के बाद अब सीजेपी के संस्थापक यहां भूख हड़ताल कर रहे हैं। यहीं से वह आस संसद तक मार्च निकालेंगे। तो आइए जानते हैं लोग आखिर जंतर-मंतर पर ही क्यों आंदोलन या प्रदर्शन करते हैं?
दिल्ली के जंतर-मंतर का नाम सुनते ही लोगों को जहन में एक ही बात याद आती है कि यहां कोई भूख हड़ताल या आंदोलन चल रहा है। अन्ना हजारे से लेकर सोनम वांगचुक तक ने दिल्ली की इसी जगह पर आमरण अनशन किया। अब सबसे बड़ा सवाल सबके मन में यही उठता है कि सभी लोग सरकार के खिलाफ या अन्य कोई वजह से जंतर-मंतर पर ही क्यों आंदोलन करते हैं। आखिर इसके पीछे क्या कारण हैं? इसको कब और किसने बनाया था...आइए जानते हैं इसके पीछे के दिलचस्प फैक्ट
1. संसद के करीब
दिल्ली का जंतर-मंतर संसद भवन, मंत्रियों के आवास और सरकारी इमारतों के सबसे पास है। अगर कोई यहां आंदोलन या प्रदर्शन करता है, तो उनकी मांगों की आवाज़ सीधे इन भवनों में बैठे प्रशासन प्रमुख और सत्ताधीशों के कानों तक जाती है। इसलिए लोग यहां बैठकर स्ट्राइक करते हैं, ताकि इन नेताओं को पता लग सके कि कोई उनकी नीति या निमय के खिलाफ विरोध कर रहा है। जिसे वह सुधार कर सकें।
2. पुलिस प्रशासन ने दी अनुमति
जंतर मंतर पर विरोध-प्रदर्शन इसलिए और किया जाता है, क्योंकि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, दिल्ली पुलिस और प्रशासन ने जंतर-मंतर को प्रदर्शनों के लिए अधिकृत किया हुआ है। इस मैदान के आसपास वीवीआईपी मूवमेंट होता है, जिसके प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था में ज्यादा दिक्कत नहीं होती है।
3. 1993 में घोषित हुआ धरना स्थल
साल 1993 से पहले दिल्ली में इंडिया गेट पास 'बोट क्लब' प्रमुख धरना स्थल था, लेकिन वहां भारी भीड़ होने की वजह से तत्कालीन सरकार ने विरोध-प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर घोषित कर दिया। तभी से यहां से लगातार आंदोलन होते रहते हैं।
4. ऐतिहासिक हड़तालों के लिए गवाह जंतर-मंतर
बता दें कि जंतर-मंतर का इतिहास देश के सबसे प्रमुख और ऐतिहासिक आंदोलनों (जैसे अन्ना हजारे का लोकपाल आंदोलन, पहलवानों का विरोध, और शिक्षा-व्यवस्था को लेकर और किसान आंदोलन के लिए गवाह रहा है। इसिलए लोग यहीं पर हड़ताल करते हैं।
5. जंतर-मंतर किसने और कब बनाया था
दिल्ली के जंतर-मंतर का निर्माण 1724 में जयपुर के महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने करवाया था। बताया जाता है कि इसे बनवाने के पीछे भी एक घटना है। करीब 300 साल पहले हिंदू और मुस्लिम खगोलशास्त्रियों के बीच ग्रहों की स्थिति को लेकर बहस छिड़ गई थी। इस बहस को शांत करने के लिए जय सिंह ने जंतर-मंतर का निर्माण कराया था। इसके साथ साथ जय सिंह ने जयपुर, मथुरा, उज्जैन और वाराणसी में भी ऐसे जंतर-मंतर बनवाए थे।


