कर्नाटक के बादामी गुफा में एक पर्यटक ने चप्पल पहनने पर ASI कर्मचारी से बहस की। पर्यटक ने इसे धार्मिक अपमान बताया। वीडियो वायरल होने के बाद संरक्षित स्मारकों में कर्मचारियों के लिए नियमों को लेकर बहस छिड़ गई है।

कर्नाटक के बादामी कस्बे में मौजूद ऐतिहासिक मेनाबसिडी साइट पर उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया, जब एक टूरिस्ट ने आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) की एक महिला कर्मचारी को चप्पल पहनकर स्मारक के अंदर जाने पर टोक दिया। बागलकोट जिले के मशहूर बादामी गुफा मंदिर में हुई इस घटना का वीडियो भी बनाया गया, जो अब ऑनलाइन वायरल हो गया है। इस वीडियो के सामने आने के बाद धार्मिक पवित्रता, ऐतिहासिक जगहों के नियम और संरक्षित स्मारकों के अंदर लोगों के व्यवहार को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है।

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वायरल हो रहे वीडियो में दिख रहा है कि एक टूरिस्ट ASI की महिला कर्मचारी से काफी गुस्से में सवाल कर रही है कि वह चप्पल पहनकर परिसर के अंदर क्यों हैं। टूरिस्ट ने सीनियर अधिकारियों से तुरंत दखल देने की मांग की। उसका आरोप था कि कर्मचारी ने जूते-चप्पल पहनकर मंदिर परिसर में घूमकर और बैठकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।

इस तीखी बहस के दौरान अपनी सफाई में ASI कर्मचारी ने कहा कि वह अपनी ऑफिशियल ड्यूटी के निर्देशों का पालन कर रही थीं। उन्होंने टूरिस्ट से कहा कि वह चाहें तो संरक्षित ऐतिहासिक स्थल के अंदर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए जूते-चप्पल से जुड़े नियमों की पुष्टि कर सकती हैं।

इस पूरी नोकझोंक के दौरान ASI की महिला कर्मचारी काफी सहमी हुई नजर आईं। बाद में वह फोन पर अपने सुपरवाइजर से बात करते हुए रोती हुई भी दिखीं।

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इस विवाद ने सोशल मीडिया पर लोगों को दो गुटों में बांट दिया है। कई यूजर्स ने टूरिस्ट का समर्थन करते हुए कहा कि 6वीं सदी के बादामी गुफा मंदिर पवित्र स्थल हैं। यहां सभी को, चाहे वो सरकारी कर्मचारी ही क्यों न हों, जगह की पवित्रता बनाए रखने के लिए जूते-चप्पल उतारने चाहिए।

फिलहाल, ASI ने इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। यह भी साफ नहीं किया गया है कि स्मारक परिसर के अंदर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए जूते-चप्पल को लेकर क्या नियम हैं या कौन से इलाके 'फुटवियर-फ्री' हैं।