Suvendu Adhikari CM Inside Story: पश्चिम बंगाल में बीजेपी की पहली सरकार बनने जा रही है और शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। जानिए आखिर बीजेपी ने उन्हें ही CM क्यों चुना, कैसे बनी उनकी मजबूत दावेदारी और क्या है पूरी इनसाइड स्टोरी।

BJP First Bengal CM Suvendu Adhikari: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आखिरकार वह पल आ ही गया, जिसकी चर्चा पिछले कई महीनों से लगातार हो रही थी। भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार बंगाल की सत्ता पर कब्जा कर लिया है और अब पार्टी ने अपने सबसे आक्रामक और भरोसेमंद चेहरे सुवेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंप दी है।

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कोलकाता में हुई बीजेपी विधायक दल की बैठक में शुभेंदु अधिकारी के नाम पर अंतिम मुहर लगी। इसके बाद गृह मंत्री अमित शाह ने उनके नाम का औपचारिक ऐलान किया। अब शनिवार सुबह ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बीजेपी ने बंगाल में इतने बड़े नेताओं के बीच शुभेंदु अधिकारी को ही मुख्यमंत्री क्यों चुना? इसके पीछे सिर्फ चुनावी जीत नहीं, बल्कि कई राजनीतिक और रणनीतिक कारण बताए जा रहे हैं।

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क्यों शुभेंदु अधिकारी ही बने बीजेपी की पहली पसंद?

बीजेपी के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो शुभेंदु अधिकारी पिछले कुछ वर्षों में बंगाल में पार्टी का सबसे मजबूत चेहरा बनकर उभरे। उन्होंने केवल चुनावी राजनीति नहीं की, बल्कि बंगाल में बीजेपी के संगठन को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई।

सबसे अहम बात यह रही कि उन्होंने सीधे ममता बनर्जी को चुनौती दी और उन्हें राजनीतिक तौर पर लगातार घेरा। नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराने के बाद शुभेंदु अधिकारी बीजेपी के लिए बंगाल में “फाइटर फेस” बन गए थे।

2026 के चुनाव में भवानीपुर सीट पर बड़ी जीत ने उनकी दावेदारी को और मजबूत कर दिया। पार्टी नेतृत्व को लगा कि बंगाल में सत्ता परिवर्तन का सबसे बड़ा प्रतीक अगर कोई चेहरा बन सकता है, तो वह शुभेंदु अधिकारी ही हैं।

अमित शाह और संगठन का भरोसा बना सबसे बड़ा कारण

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि शुभेंदु अधिकारी की सबसे बड़ी ताकत उनका संगठन कौशल और केंद्रीय नेतृत्व से मजबूत तालमेल रहा।

जब उन्होंने 2020 में तृणमूल कांग्रेस छोड़कर बीजेपी जॉइन की थी, उसी समय यह साफ हो गया था कि पार्टी उन्हें बंगाल की राजनीति में बड़ी भूमिका देने वाली है। मेदिनीपुर की रैली में अमित शाह ने जिस तरह सार्वजनिक रूप से उन्हें समर्थन दिया था, वह उनके राजनीतिक भविष्य का बड़ा संकेत माना गया।

बीजेपी नेतृत्व का मानना है कि शुभेंदु अधिकारी आक्रामक राजनीति, संगठन और जनसंपर्क-तीनों स्तरों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। यही वजह रही कि विधायक दल की बैठक में उनके नाम पर लगभग सहमति बन गई।

कभी ममता के करीबी, आज सबसे बड़े विरोधी

शुभेंदु अधिकारी की राजनीतिक यात्रा बेहद दिलचस्प रही है। उन्होंने छात्र राजनीति कांग्रेस से शुरू की थी, लेकिन बाद में ममता बनर्जी के साथ तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए। 2007 के नंदीग्राम आंदोलन ने उन्हें बंगाल की राजनीति का बड़ा चेहरा बना दिया। लंबे समय तक वे ममता सरकार के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते रहे। लेकिन 2020 में दोनों के रिश्तों में दूरी बढ़ी और शुभेंदु अधिकारी ने TMC छोड़ दी। बीजेपी में शामिल होने के बाद उन्होंने खुद को ममता बनर्जी के सबसे बड़े राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के रूप में स्थापित कर लिया। 2021 में नंदीग्राम और फिर 2026 में भवानीपुर की जीत ने उनकी छवि को और मजबूत कर दिया।

बीजेपी की बंगाल रणनीति में क्यों फिट बैठते हैं शुभेंदु?

बीजेपी के लिए बंगाल केवल एक राज्य नहीं, बल्कि पूर्वी भारत की राजनीति का सबसे बड़ा प्रवेश द्वार माना जाता है। ऐसे में पार्टी को ऐसे चेहरे की जरूरत थी जो संगठन और जनाधार दोनों को संभाल सके। शुभेंदु अधिकारी ग्रामीण बंगाल, हिंदुत्व राजनीति और संगठनात्मक रणनीति, तीनों के बीच संतुलन बनाने वाले नेता माने जाते हैं। उनकी छवि एक आक्रामक लेकिन जमीनी नेता की है। बीजेपी को उम्मीद है कि शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में पार्टी बंगाल में अपनी पकड़ और मजबूत करेगी और लंबे समय तक सत्ता में टिकने की रणनीति तैयार करेगी।

शपथ ग्रहण से पहले दिए बड़े संकेत

मुख्यमंत्री चुने जाने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने साफ कहा कि उनकी सरकार “कम बोलेगी और ज्यादा काम करेगी।” उन्होंने भ्रष्टाचार, घुसपैठ और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सख्त कार्रवाई के संकेत दिए। उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी सरकार प्रधानमंत्री Narendra Modi की सभी गारंटियों को जमीन पर उतारने का काम करेगी और बंगाल को “सोनार बांग्ला” बनाने की दिशा में आगे बढ़ेगी।

बंगाल की राजनीति में नए युग की शुरुआत?

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक शुभेंदु अधिकारी का मुख्यमंत्री बनना केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीति के नए दौर की शुरुआत माना जा रहा है। जो नेता कभी ममता बनर्जी की टीम का अहम हिस्सा था, वही आज बीजेपी का सबसे बड़ा चेहरा बनकर राज्य की सत्ता संभालने जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि शुभेंदु अधिकारी चुनावी नारों को जमीन पर कितनी तेजी से उतार पाते हैं।

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