क्या लैंडिंग से ठीक पहले AN-32 में कोई रहस्यमय तकनीकी खराबी हुई थी, जिसने 5 IAF जवानों की जान ले ली? प्रत्यक्षदर्शी ने धमाके से पहले काला धुआं क्यों देखा, क्या विमान पहले से संकट में था? 1986 से AN-32 के 22 से अधिक हादसों के बावजूद, क्या यह विमान अब भी सुरक्षित माना जा सकता है? सुखोई-30MKI हादसे के कुछ महीनों बाद ही दूसरा बड़ा क्रैश क्यों हुआ?

जोरहाट (असम): शनिवार की दोपहर पूर्वोत्तर का आसमान एक बार फिर सैन्य विमान के मलबे और धुएं के गुबार से काला हो गया। असम के रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील जोरहाट स्थित राउरिया एयर फ़ोर्स स्टेशन पर भारतीय वायु सेना (IAF) का एक AN-32 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट लैंडिंग के वक्त भीषण हादसे का शिकार हो गया। इस दिल दहला देने वाली दुर्घटना में वायु सेना के 5 जांबाज जवानों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि विमान के को-पायलट चमत्कारिक रूप से जिंदा बच गए हैं। यह हादसा उस वक्त हुआ जब विमान अपनी उड़ान पूरी कर रनवे को छूने ही वाला था।

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अरुणाचल से लौट रहा था विमान, फिर अचानक क्यों टूटा संपर्क?

अरुणाचल प्रदेश के अग्रिम मोर्चे से उड़ान भरकर आया यह AN-32 विमान ऊपरी असम के इस महत्वपूर्ण एयर बेस पर उतरने की तैयारी कर रहा था। सब कुछ तय प्रोटोकॉल के मुताबिक था, लेकिन पहिए जमीन पर टिकते, उससे पहले ही मौत ने विमान को घेर लिया। एयर बेस की बाउंड्री वॉल के ठीक पास रहने वाले एक स्थानीय निवासी ने उस खौफनाक मंजर को याद करते हुए बताया, "मैंने खिड़की से देखा कि विमान का पिछला हिस्सा (टेल सेक्शन) अजीब तरह से हवा में स्थिर था और उससे घना काला धुआं निकल रहा था। मैं डरकर उस जगह से दूर भागने ही लगा कि अचानक एक ऐसा गगनभेदी धमाका हुआ जिससे मेरी धरती हिल गई।"

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जीवन और मौत से जंग लड़ रहा को-पायलट

धमाके की गूंज सुनते ही राउरिया एयर फ़ोर्स स्टेशन के भीतर खतरे के सायरन बज उठे। वायु सेना की इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमें, दमकल की गाड़ियां और सैन्य डॉक्टर तुरंत मलबे की तरफ दौड़े। चारों तरफ विमान के परखच्चे बिखरे थे और आग की लपटें उठ रही थीं। रेस्क्यू टीम ने बेहद बहादुरी से काम करते हुए गंभीर रूप से घायल को-पायलट को मलबे से बाहर निकाला, जिन्हें तुरंत सेना के अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां वे जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। हालांकि, अन्य 5 जवानों को बचाया नहीं जा सका। वायु सेना ने दुखद पुष्टि करते हुए कहा कि लैंडिंग के दौरान हुए इस क्रैश में हमारे पांच बहादुर जवानों की जान चली गई है।

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प्रत्यक्षदर्शी का दावा: 'पहले धुआं दिखा, फिर धरती हिला देने वाला धमाका'

एयर फ़ोर्स स्टेशन की सीमा दीवार के पास रहने वाले एक स्थानीय निवासी ने भयावह दृश्य का वर्णन करते हुए बताया कि उसने विमान का पिछला हिस्सा और आसमान में उठता घना काला धुआं देखा था। उसने कहा, “विमान कुछ असामान्य लग रहा था। जैसे ही मैं उस दिशा से हटने लगा, एक जबरदस्त धमाका हुआ। धमाके की आवाज़ इतनी तेज थी कि पूरा इलाका कांप उठा।” इस बयान ने हादसे को लेकर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या विमान में हवा में ही कोई गंभीर खराबी आ गई थी? या फिर लैंडिंग के दौरान नियंत्रण खो गया?

जांच शुरू, कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी करेगी असली वजह का खुलासा

भारतीय वायु सेना ने हादसे के तुरंत बाद 'कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी' के आदेश दे दिए हैं। विशेषज्ञों की टीम फ्लाइट डेटा, तकनीकी रिकॉर्ड, मौसम संबंधी जानकारी और एयर ट्रैफिक कंट्रोल के संवादों की जांच करेगी। वायु सेना का लक्ष्य यह पता लगाना है कि आखिर दुर्घटना की जड़ क्या थी।

आखिर क्यों बार-बार 'उड़ता ताबूत' साबित हो रहा है AN-32?

इस खौफनाक हादसे ने एक बार फिर भारतीय वायु सेना के इस सबसे भरोसेमंद माने जाने वाले विमान के सुरक्षा रिकॉर्ड पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, साल 1986 से लेकर अब तक भारत में AN-32 विमानों के साथ करीब 22 क्रैश की घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें सबसे हालिया हादसा पिछले ही साल यानी 2025 में दर्ज किया गया था। इस डरावने इतिहास के बावजूद, देश के दुर्गम और पहाड़ी इलाकों में लॉजिस्टिक्स, रसद और ऑपरेशनल मिशनों को अंजाम देने के लिए यह एयरक्राफ्ट आज भी वायु सेना की रीढ़ बना हुआ है। लेकिन बार-बार होते ये हादसे अब किसी गहरी तकनीकी या रखरखाव की खामी की ओर इशारा कर रहे हैं।

सुखोई के बाद अब AN-32; आसमान में गहराता जा रहा है रहस्य!

रक्षा गलियारों में इस बात को लेकर गहरी चिंता और सस्पेंस है कि आखिर जोरहाट के आसमान में ऐसा क्या है जो कुछ ही महीनों के भीतर दो बड़े हादसे हो गए? याद दिला दें कि कुछ महीने पहले ही इसी जोरहाट एयर बेस से लगभग 60 किलोमीटर दूर कार्बी आंगलोंग ज़िले के बोकाजन सब-डिविजन में स्थित इंगलोंग एकोपी पहाड़ी पर IAF का एक अत्याधुनिक सुखोई-30MKI फाइटर जेट भी रूटीन ट्रेनिंग के दौरान क्रैश हो गया था।

अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर

फिलहाल पूरे देश की निगाहें कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी की रिपोर्ट पर टिकी हैं। क्या यह महज एक तकनीकी विफलता थी, या इसके पीछे कोई और गहरी वजह छिपी है? पांच जवानों की शहादत ने इस सवाल को और गंभीर बना दिया है। जब तक जांच पूरी नहीं होती, जोरहाट एयर बेस पर हुआ यह हादसा कई अनसुलझे रहस्यों और सवालों के साथ चर्चा का केंद्र बना रहेगा।