IIT BHU के पूर्व छात्र आकाश पांडे ने 2019 के इंटरव्यू का अनुभव साझा किया। IIT टैग पर सवाल के बाद उन्होंने करियर में वापसी की और अब न्यूयॉर्क में कामयाब सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं।

Success Story: IIT BHU के एक पूर्व छात्र ने हाल ही में 2019 में हुए एक जॉब इंटरव्यू का अनुभव शेयर किया। इस इंटरव्यू में उनसे पूछा गया था कि IIT से ग्रेजुएशन करने के बावजूद वह एंट्री-लेवल डेटा एनालिस्ट की नौकरी के लिए आवेदन क्यों कर रहे हैं। इस नौकरी में करीब 40,000 रुपये प्रति माह वेतन मिल रहा था। टेक प्रोफेशनल ने बताया कि इंटरव्यू के दौरान कही गई एक बात ने उन्हें अपने करियर और अब तक की प्रगति को लेकर सोचने पर मजबूर कर दिया था।

IIT टैग के बावजूद एंट्री-लेवल नौकरी के सवाल ने तोड़ा कॉन्फिडेंस

न्यूयॉर्क में रहने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर और IIT BHU के पूर्व छात्र आकाश संपूर्णानंद पांडे ने LinkedIn पर इस अनुभव के बारे में लिखा। उन्होंने बताया कि उन्होंने 2016 में IIT BHU, वाराणसी से ग्रेजुएशन किया था। ग्रेजुएशन के करीब तीन साल बाद, 2019 में उन्होंने UPSC की तैयारी छोड़ दी थी। इसके बाद करियर में आए गैप के बाद वह दोबारा इंडस्ट्री में लौटने की कोशिश कर रहे थे। एक इंटरव्यू के दौरान इंटरव्यू लेने वाले ने उनसे कहा, “अरे, IIT से होने के बावजूद आप यहीं हैं?” पांडे के मुताबिक, यह टिप्पणी उनके लिए काफी परेशान करने वाली थी। उन्होंने बताया कि इस बात ने उन्हें गहरा झटका दिया और उनका आत्मविश्वास प्रभावित हुआ। उन्होंने लिखा कि उस समय उन्हें खुद को असफल महसूस होने लगा था।

IIT से जुड़ी उम्मीदों और दबाव पर कही बड़ी बात

पांडे ने बताया कि इस अनुभव से उन्हें समझ आया कि IIT टैग के साथ लगातार सफल रहने की एक उम्मीद भी जुड़ी होती है। उनके मुताबिक, IIT से पढ़ाई करने के बाद लोगों से यह अपेक्षा की जाती है कि उनका करियर हमेशा तेजी से आगे बढ़ता रहेगा। उन्होंने लिखा कि IIT टैग कई दरवाजे खोलता है, लेकिन इसके साथ एक ऐसा दबाव भी आता है जिसके बारे में कोई पहले से चेतावनी नहीं देता।

बैच के टॉप 1% छात्रों से करते रहे तुलना

पांडे ने बताया कि उन्होंने कई महीनों तक खुद की तुलना अपने बैच के टॉप 1% छात्रों से की। इस वजह से उन्हें खुद को लेकर असमंजस और खोया हुआ महसूस हुआ।उन्होंने कहा कि मीडिया अक्सर उन IIT ग्रेजुएट्स की कहानियों पर ज्यादा ध्यान देता है, जिन्होंने अपने करियर में असाधारण सफलता हासिल की है। लेकिन उनकी नजर में ज्यादातर IIT ग्रेजुएट्स अच्छी सैलरी वाली और संतोषजनक नौकरियां करते हैं, भले ही उनकी नौकरियां हमेशा ग्लैमरस या चर्चा में रहने वाली न हों। पांडे ने बताया कि उन्होंने अपने करियर में वापसी के लिए लंबा रास्ता चुना। उन्होंने लिखा, “इसलिए मैंने वापसी के लिए लंबा रास्ता चुना।

न्यूयॉर्क में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर काम कर रहे आकाश

पांडे के मुताबिक, इसके बाद उन्होंने अमेरिका में अपना करियर बनाया और फिलहाल न्यूयॉर्क में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मौजूदा कुल आय उन्हें अमेरिका में टॉप 2% आय वालों की श्रेणी में काफी ऊपर रखती है। अपने अनुभव पर विचार करते हुए पांडे ने कहा कि कुछ लोगों को किसी IITian को संघर्ष करते हुए देखकर संतुष्टि मिल सकती है। इसकी एक वजह यह भी है कि भारत में IIT और इसके लिए होने वाली प्रवेश परीक्षा को काफी महत्व दिया जाता है।

कोई भी प्रवेश परीक्षा आपकी जिंदगी तय नहीं करती

हालांकि, पांडे ने कहा कि एक बात ऐसी है, जिसे समझना लोगों को इस दबाव से मुक्त कर सकता है। उन्होंने लिखा कि JEE परीक्षा का उद्देश्य कभी भी किसी व्यक्ति के लिए उम्रभर की सजा या पूरी जिंदगी की गारंटी तय करना नहीं था। उन्होंने आगे कहा कि जो व्यक्ति IIT में प्रवेश नहीं ले पाया और इसका बोझ ढोता रहता है, या जो IIT का टैग होने के बावजूद खुद को कमतर समझता है, दोनों एक ही सोच में फंसे हुए हैं। उनके मुताबिक, यह मानना कि 18 साल की उम्र में दी गई एक प्रवेश परीक्षा किसी व्यक्ति की पूरी जिंदगी की सीमाएं तय कर सकती है, सही सोच नहीं है।

LinkedIn पर पोस्ट को मिली प्रतिक्रिया

आकाश संपूर्णानंद पांडे की LinkedIn पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर चर्चा शुरू हो गई। कई यूजर्स ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि किस तरह प्रतिष्ठित संस्थानों से पढ़ाई करने के बाद भी करियर में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। एक यूजर ने बताया कि ग्रेजुएशन के बाद उसकी भी ऐसी ही बातचीत एक ऐसे व्यक्ति से हुई थी, जिसने IIT के बजाय किसी दूसरे प्रतिष्ठित संस्थान से पढ़ाई की थी। यूजर ने कहा कि यह समझना जरूरी है कि असफलताएं जिंदगी का सामान्य हिस्सा हैं और कई बार व्यक्ति को सिर्फ आगे बढ़ते रहना होता है।

‘IIT में जाने से उम्मीदों का बोझ बढ़ जाता है’

एक अन्य यूजर ने पांडे की बात से सहमति जताते हुए कहा कि IIT में जाने के बाद लोगों पर बहुत ज्यादा उम्मीदों का बोझ आ जाता है। यह दबाव कई बार खुद IITians पर भी होता है। यूजर ने कहा कि जिंदगी एक लंबा सफर है और असफलताएं इसका हिस्सा हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि IIT में जाना अपने आप में एक व्यक्तिगत उपलब्धि है। उनके लिए यह उपलब्धि इस बात की याद दिलाती है कि उन्होंने पहले भी मुश्किल परिस्थितियों का सामना किया है और आगे भी ऐसा कर सकते हैं।