क्या HAL को बाहर कर भारत ने डिफेंस इतिहास का सबसे बड़ा बदलाव कर दिया? क्या AMCA (15,000 करोड़) प्रोजेक्ट भारत की एयर पावर को पूरी तरह बदल देगा? क्या प्राइवेट कंपनियां अब भारत का 5वीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर बनाएंगी? क्या 2035 तक भारत F-35, J-20 जैसी एलीट फाइटर रेस में शामिल हो जाएगा?

AMCA Stealth Fighter India: आज़ादी के बाद पहली बार, भारतीय आसमान की सुरक्षा से जुड़े सबसे बड़े और सीक्रेट मिशन-एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोग्राम-के दरवाज़े प्राइवेट कंपनियों के लिए खोल दिए गए हैं। लेकिन इस कहानी का सबसे बड़ा ट्विस्ट यह है कि सरकारी एयरोस्पेस दिग्गज हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को इस शुरुआती प्रोटोटाइप कॉम्पिटिशन के फेज से पूरी तरह बाहर कर दिया गया है। इस हैरान करने वाले फैसले ने देश के एयरोस्पेस कॉरिडोर में खलबली मचा दी है। आखिर क्यों सरकार ने अपनी सबसे भरोसेमंद सरकारी कंपनी को दरकिनार कर इस ₹15,000 करोड़ के मेगा प्रोजेक्ट की कमान प्राइवेट हाथों में सौंपने का रिस्क लिया?

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

सीक्रेट कंसोर्टियम: कौन संभालेगा भारत के पहले स्टेल्थ फाइटर की कमान?

जैसे ही HAL रेस से बाहर हुआ, भारतीय डिफेंस इंडस्ट्री के तीन बड़े दिग्गजों ने इस खाली जगह को भरने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इस महा-मुकाबले में अब सीधी टक्कर इन दो बड़े कंसोर्टियम के बीच है:

  • पहला कंसोर्टियम: टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स (TASL), जो L&T, BEL और डायनेमैटिक टेक्नोलॉजीज़ के साथ मिलकर इस रेस को लीड कर रहा है।
  • दूसरा कंसोर्टियम: भारत फोर्ज, BEML और डेटा पैटर्न्स की जुगलबंदी, जो अपनी अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी के दम पर चुनौती दे रही है।

जो भी कंपनी या कंसोर्टियम इस कांटे के मुकाबले को जीतेगा, वो एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) और DRDO के साथ मिलकर आंध्र प्रदेश के पुट्टपर्थी में एक बिल्कुल नए, अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड एयरोस्पेस कॉम्प्लेक्स में पांच उड़ने वाले प्रोटोटाइप और एक स्ट्रक्चरल टेस्ट एयरक्राफ्ट का निर्माण करेगा।

2035 का मिशन: क्या समय सीमा के चक्रव्यूह को भेद पाएगा प्राइवेट सेक्टर?

  • इस ऐतिहासिक और साहसी फैसले के पीछे सरकार की एक गहरी रणनीति छिपी है-'वक्त की पाबंदी'।
  • दशकों से सरकारी कंपनियों पर प्रोजेक्ट्स में देरी के आरोप लगते रहे हैं।
  • सरकार को उम्मीद है कि प्राइवेट सेक्टर की इंडस्ट्रियल एफिशिएंसी और आक्रामक कार्यशैली से इस महा-प्रोजेक्ट की टाइमलाइन को तेज़ किया जा सकेगा।

रणनीति के मुताबिक, इस प्रोटोटाइप फेज़ की पूरी फंडिंग सरकार खुद करेगी, जबकि प्राइवेट पार्टनर्स को ADA और DRDO के वैज्ञानिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करना होगा। लेकिन असली चुनौती समय की है:

  • प्रस्ताव जमा करने की समय सीमा: अगले कुछ महीने।
  • अंतिम चयन और कॉन्ट्रैक्ट: जनवरी से मार्च 2027 के बीच।
  • पहली उड़ान का सस्पेंस: 2028 से 2032 के बीच।
  • सेना में एंट्री: साल 2035 के बाद।

Scroll to load tweet…

सुपर-पावर देशों को सीधी चुनौती: F-35 और Su-57 के क्लब में भारत की एंट्री

  • यह सिर्फ एक फाइटर जेट बनाने का प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि दुनिया के नक्शे पर भारत की ताकत को री-डिफाइन करने का मिशन है।
  • वर्तमान में केवल अमेरिका (F-22, F-35), चीन (J-20) और रूस (Su-57) के पास ही ऑपरेशनल पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट्स हैं।
  • AMCA की सफलता भारत को इस बेहद एलीट और वीआईपी क्लब का चौथा सदस्य बना देगी।
  • इंडियन एयर फ़ोर्स (IAF) अपने बेड़े से पुराने हो रहे चौथी पीढ़ी के विमानों को हटाकर लगभग 120 AMCA एयरक्राफ्ट शामिल करने का प्लान बना रही है, जो भविष्य में भारतीय वायुसेना की रीढ़ बनेंगे।

आसमान का अदृश्य शिकारी: क्या हैं इस पांचवीं पीढ़ी के फाइटर की खूबियां?

  • AMCA को एक ऐसे 'अदृश्य शिकारी' के रूप में डिज़ाइन किया जा रहा है, जिसे दुश्मनों के रडार कभी पकड़ ही न पाएं।
  • रडार को चकमा देने वाली 'कम दिखाई देने वाली स्टेल्थ शेपिंग' और एडवांस्ड रडार-एब्जॉर्बिंग कोटिंग्स के साथ यह विमान नेटवर्क-सेंट्रिक कॉम्बैट क्षमताओं से लैस होगा।

इस ट्विन-इंजन और सिंगल-सीट फाइटर की ताकत के आंकड़े किसी के भी होश उड़ाने के लिए काफी हैं:

  • ऑपरेशनल ऊंचाई: 55,000 फीट तक का आसमान।
  • इंटरनल वेपन बे (हथियार क्षमता): स्टेल्थ मोड बनाए रखने के लिए अंदरूनी हिस्से में 1,500 किलोग्राम हथियार।
  • एक्सटर्नल पेलोड: ज़रूरत पड़ने पर बाहर 5,500 किलोग्राम अतिरिक्त हथियार।
  • ईंधन क्षमता: करीब 6,500 किलोग्राम फ्यूल कैपेसिटी, जो इसे लंबी दूरी के मिशन के लिए घातक बनाती है।

प्राइवेट सेक्टर के लिए यह दांव जितना बड़ा है, देश की सुरक्षा के लिए यह मिशन उतना ही संवेदनशील है। अब देखना यह है कि 2027 की शुरुआत में किस प्राइवेट दिग्गज के सिर पर इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट का ताज सजेगा!