ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल भेजेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी विशेष निमंत्रण मिला था। जानिए कौन करेगा भारत का प्रतिनिधित्व और कब होंगे अंतिम संस्कार के कार्यक्रम।

भारत और ईरान के कूटनीतिक रिश्तों के बीच एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोह में भारत आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल भेजेगा। सूत्रों के अनुसार, बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब ईरान में राजनीतिक बदलाव का दौर चल रहा है और दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को बनाए रखने पर भी जोर दिया जा रहा है।

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PM नरेंद्र मोदी को मिला था विशेष निमंत्रण

जानकारी के अनुसार, 26 जून को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को व्यक्तिगत रूप से अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि समारोह में शामिल होने का निमंत्रण भेजा था। यह निमंत्रण आधिकारिक राजनयिक माध्यमों से नई दिल्ली पहुंचाया गया था। हालांकि प्रधानमंत्री की जगह भारत सरकार ने उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजने का निर्णय लिया है।

5 से 9 जुलाई तक होंगे समारोह

ईरान में श्रद्धांजलि और अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम 5 जुलाई से 9 जुलाई तक आयोजित किए जाएंगे। 5, 6 और 7 जुलाई को तेहरान और क़ोम में विभिन्न श्रद्धांजलि सभाएं होंगी, जबकि 9 जुलाई को मशहद में अंतिम संस्कार की मुख्य रस्म पूरी किए जाने की संभावना है।

खामेनेई की मौत के बाद बदला राजनीतिक परिदृश्य

अयातुल्ला अली खामेनेई लगभग तीन दशकों तक ईरान के सर्वोच्च नेता रहे। 28 फरवरी को तेहरान पर अमेरिका और इज़राइल के बड़े हवाई हमलों के दौरान उनकी मौत हो गई थी। उनकी मृत्यु के बाद ईरान की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला और दुनिया के कई देशों ने इस पर प्रतिक्रिया दी।

भारत-ईरान संबंधों पर रहेगी नजर

भारत और ईरान के बीच ऊर्जा, व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे कई मुद्दों पर लंबे समय से सहयोग रहा है। ऐसे में अंतिम संस्कार समारोह में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी को दोनों देशों के पारंपरिक कूटनीतिक संबंधों को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह भी देखा जाएगा कि ईरान के नए राजनीतिक नेतृत्व के साथ भारत अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को किस तरह आगे बढ़ाता है।