West Bengal OBC Reservation: पश्चिम बंगाल विधानसभा ने OBC आरक्षण से जुड़े दो अहम विधेयक पारित कर दिए हैं। अब राज्य सरकार पिछली OBC सूची में बदलाव कर नई सूची तैयार कर सकेगी।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को एक बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। राज्य विधानसभा ने OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) आरक्षण से जुड़े दो महत्वपूर्ण विधेयकों को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इन नए कानूनों के लागू होने के बाद राज्य सरकार को पिछली सरकार के दौरान तैयार की गई OBC सूची में बदलाव करने और नई सूची तैयार करने का अधिकार मिल जाएगा। यह फैसला आने वाले समय में राज्य की आरक्षण व्यवस्था और सरकारी नौकरियों में OBC आरक्षण की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।

क्या बदलेगा नए कानून से?
पारित किए गए दोनों विधेयक OBC आरक्षण और पिछड़ा वर्ग आयोग (Backward Classes Commission) से जुड़े मौजूदा कानूनों में संशोधन करते हैं। नए प्रावधानों के तहत राज्य सरकार आयोग से सलाह लेकर OBC सूची में किसी भी समुदाय को शामिल करने या हटाने का फैसला कर सकेगी। साथ ही, OBC समुदायों को उनकी सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में भी बांटा जा सकेगा। हालांकि, राज्य में कुल आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत ही रहेगी।
पिछड़ा वर्ग आयोग की भूमिका होगी अहम
संशोधित व्यवस्था में पिछड़ा वर्ग आयोग को अधिक अधिकार दिए गए हैं। आयोग किसी भी समुदाय को OBC सूची में शामिल करने या हटाने पर अपनी आपत्ति या सुझाव दर्ज कर सकेगा। अंतिम निर्णय राज्य सरकार आयोग के साथ विचार-विमर्श के बाद लेगी।
विधानसभा में गरमाई बहस
विधेयकों पर चर्चा के दौरान विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी हुई। भाजपा विधायकों ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने राजनीतिक लाभ के लिए OBC सूची का विस्तार किया था, जिससे कुछ समुदायों को अधिक लाभ मिला। वहीं, सत्तारूढ़ पक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नई व्यवस्था सामाजिक न्याय और पारदर्शिता को मजबूत करेगी।
2010 की व्यवस्था होगी बहाल
नए कानून के तहत वर्ष 2010 में लागू आरक्षण व्यवस्था के ढांचे को फिर से लागू किया जाएगा। इसके साथ ही वर्ष 2011 के बाद किए गए कुछ संशोधनों को हटाकर OBC सूची को नए सिरे से तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होगी। इन विधेयकों को पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री ने विधानसभा में पेश किया, जिन्हें ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। अब राज्य सरकार जल्द ही पिछड़ा वर्ग आयोग के साथ मिलकर नई OBC सूची तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ेगी। यह फैसला पश्चिम बंगाल की आरक्षण नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है और इसका असर आने वाले समय में सरकारी भर्तियों और आरक्षण व्यवस्था पर देखने को मिल सकता है।


