ईरान पर हमले के बाद अमेरिका में राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों पर बहस छिड़ गई है। संविधान कांग्रेस को युद्ध की घोषणा का अधिकार देता है, पर राष्ट्रपति कमांडर-इन-चीफ हैं। रिपब्लिकन हमले के पक्ष में हैं, जबकि डेमोक्रेट्स विरोध कर रहे हैं।

न्यूयॉर्क: क्या ईरान पर हमला करने के लिए डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिकी कांग्रेस की इजाजत चाहिए थी? इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर हुए हमले के बाद अब हर तरफ से यही सवाल उठ रहा है। हमले के बाद जारी एक वीडियो में ट्रंप ने खुद इसे एक 'बड़ी सैन्य कार्रवाई' बताया था। अमेरिकी संविधान के आर्टिकल 1 के मुताबिक, किसी भी देश के खिलाफ जंग का आधिकारिक ऐलान करने का हक सिर्फ कांग्रेस (अमेरिकी संसद) के पास है। लेकिन इस बार कांग्रेस ने ऐसा कोई ऐलान नहीं किया है।

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हालांकि, अमेरिकी संविधान राष्ट्रपति को सैन्य कार्रवाई करने के लिए काफी अधिकार भी देता है। इसी वजह से वॉशिंगटन में इस बात पर बड़ी बहस छिड़ गई है। अमेरिकी संसद 'कैपिटल हिल' में इस हमले को लेकर नेताओं की राय बंटी हुई है। रिपब्लिकन पार्टी, जिसके पास अभी कांग्रेस के दोनों सदनों का कंट्रोल है, उसके ज्यादातर सदस्य हमले का समर्थन कर रहे हैं।

रिपब्लिकन पार्टी के हाउस स्पीकर माइक जॉनसन का कहना है कि हमले से पहले ट्रंप प्रशासन ने 'गैंग ऑफ 8' को इसकी जानकारी दी थी। 'गैंग ऑफ 8' कांग्रेस के टॉप नेताओं का एक ग्रुप होता है। वहीं, डेमोक्रेटिक पार्टी के ज्यादातर नेताओं ने इस हमले की निंदा की है। डेमोक्रेट्स का आरोप है कि ट्रंप ने कांग्रेस की इजाजत के बिना ही जंग शुरू कर दी है। वे मांग कर रहे हैं कि कांग्रेस को 'वॉर पावर्स रेजोल्यूशन' जैसे बिल पर फिर से विचार करना चाहिए, जो पिछले साल रिपब्लिकन के समर्थन के बिना फेल हो गया था।

अगर 'वॉर पावर्स रेजोल्यूशन' दोबारा लाया जाता है और पास हो जाता है, तो यह राष्ट्रपति को कांग्रेस की मंजूरी के बिना एकतरफा सैन्य कार्रवाई करने से रोक सकता है। लेकिन मौजूदा हालात में ऐसे किसी बिल के पास होने की उम्मीद कम है। अमेरिका में संविधान के हिसाब से शक्तियों का बंटवारा कुछ इस तरह है: आर्टिकल 1 कांग्रेस को जंग का ऐलान करने और सेना के लिए फंड जारी करने का अधिकार देता है। वहीं, आर्टिकल 2 के तहत राष्ट्रपति सेना का कमांडर-इन-चीफ होता है। देश पर अचानक हुए हमले से बचाने और इमरजेंसी में सैन्य कार्रवाई का फैसला लेने का अधिकार राष्ट्रपति के पास है। इन्हीं दोनों अधिकारों के बीच की लाइन अक्सर विवाद की वजह बनती है।

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