Iran-US Conflict: अमेरिका-ईरान जंग ने निकाला पाकिस्तान का दीवाला! अब तक इतना नुकसान
Pakistan Crisis: कभी दुनिया के बड़े युद्धों से तिजोरी भरने वाला पाकिस्तान अमेरिका-ईरान तनाव से कंगाली की कगार पर पहुंच गया है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, जिस 'लोकेशन' के दम पर कभी अरबों डॉलर की मदद पाता था, वही अब गले की फांस बन गई है। पढ़िए रिपोर्ट

पाकिस्तान ने कभी युद्ध बेचकर भरी थी तिजोरी
इतिहास गवाह है कि जब-जब पड़ोसी देशों या खाड़ी में तनाव हुआ, पाकिस्तान की लॉटरी लग गई। 1979 के अफगान युद्ध में जब सोवियत संघ ने अफगानिस्तान पर हमला किया, तो अमेरिका ने पाकिस्तान को अरबों डॉलर दिए। अकेले 1980 के दशक में पाकिस्तान में करीब 20 से 27 अरब डॉलर की विदेशी मदद आई। 2001 के बाद (9/11 के बाद का दौर) पाकिस्तान को अमेरिका से 13 अरब डॉलर से ज्यादा की मिलिट्री और इकॉनोमिक मदद मिली। उस समय पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में जबरदस्त उछाल आया था।
अब उल्टा पड़ रहा पाकिस्तान का दांव
आज कहानी बिल्कुल अलग है। अमेरिका-ईरान के बीच छिड़ी जंग ने पाकिस्तान को फायदे के बजाय भारी नुकसान में डाल दिया है। उसके विदेशी मुद्रा भंडार में सेंध लग गई है। इस साल पाकिस्तान के पास से 5.7 अरब डॉलर बाहर चले गए हैं, जबकि उसका कुल रिजर्व मात्र 16 अरब डॉलर के आसपास है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पाकिस्तान को साफ कह दिया है कि अप्रैल के अंत तक उसके 3.5 अरब डॉलर वापस कर दिए जाएं।
पाकिस्तान के लिए सऊदी और कतर की मदद कितने काम की?
पाकिस्तान को पूरी तरह डूबने से बचाने के लिए सऊदी अरब और कतर ने 5 अरब डॉलर की मदद का भरोसा दिया है, जो उसके लिहाज से काम की हो सकती है, लेकिन यह 'ऑक्सीजन' कब तक काम आएगी, यह कोई नहीं जानता है।
ईरान-अमेरिका जंग क्यों पाकिस्तान के लिए बड़ी मुसीबत बनी?
पाकिस्तान की इकॉनमी सीधे तौर पर हॉर्मुज जलमार्ग (Strait of Hormuz) से जुड़ी है। पाकिस्तान अपनी जरूरत का 80-85% तेल और गैस इसी रास्ते से मंगाता है। ईरान-अमेरिका तनाव की वजह से इस रास्ते पर खतरा मंडरा रहा है, जिससे पाकिस्तान का इम्पोर्ट बिल (Import Bill) आसमान छू रहा है। पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत करवाने की कोशिश की, जिसका पहला दौर फेल रहा और दूसरा दौर, जो कि शुरू होने से पहले ही अधर में दिख रहा है, क्योंकि ईरान ने इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।
ईरान-यूएस तनाव का पाकिस्तान पर कितना असर हो सकता है?
जानकारों का मानना है कि जब पाकिस्तान के पास तेल मंगाने के पैसे नहीं बचेंगे और विदेशी कर्ज का बोझ बढ़ेगा, तो इसका सीधा असर वहां की आवाम पर पड़ेगा। वहां पेट्रोल की कीमतें पहले ही रिकॉर्ड तोड़ रही हैं और अब बिजली-गैस का संकट भी गहराने वाला है। ऐसे में मुसीबतें बढ़ सकती हैं।
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