Iran US Nuclear Talks: ईरान-अमेरिका वार्ता में गतिरोध जारी है क्योंकि परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर मतभेद बने हुए हैं। सीज़फ़ायर खत्म होने के करीब है, लेकिन कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ। तनाव से ग्लोबल ऑयल और जियोपॉलिटिक्स पर असर बढ़ने की आशंका है। 

Iran America Negotiations: ईरान और अमेरिका के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी अंतिम समझौते तक पहुंचने में अभी लंबा समय लगेगा, क्योंकि दोनों देशों के बीच कई मूलभूत मतभेद अब भी बरकरार हैं। ऐसे में दो हफ़्ते का अस्थायी सीज़फ़ायर खत्म होने के करीब है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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“अभी समझौता दूर है”-तेहरान का सख्त संदेश

ईरानी नेताओं के हालिया बयानों में साफ संकेत मिला है कि बातचीत केवल सीमित प्रगति तक ही पहुँच पाई है। वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि कुछ मुद्दों पर सहमति बनी है, लेकिन कई “बुनियादी और रणनीतिक सवाल” अभी अनसुलझे हैं। ईरान का दावा है कि वह किसी भी जल्दबाज़ी में समझौता नहीं करेगा, खासकर तब जब मुद्दे उसकी संप्रभुता और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े हों।

परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज़ बना सबसे बड़ा विवाद

वार्ता में सबसे बड़ा अड़चन बिंदु ईरान का यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम और होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर नियंत्रण माना जा रहा है। अमेरिका की मांग है कि ईरान लंबे समय तक संवर्धन गतिविधियों को रोक दे और अपने परमाणु ढांचे को सीमित करे। इसके जवाब में ईरान केवल अल्पकालिक रोक पर सहमत होने की बात कह रहा है। इसी बीच, होर्मुज़ जलडमरूमध्य का मुद्दा भी तनाव बढ़ा रहा है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पाँचवाँ हिस्सा संभालता है। इस मार्ग पर किसी भी प्रकार की बाधा या नियंत्रण से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भारी अस्थिरता पैदा हो सकती है।

सीज़फ़ायर की घड़ी टिक-टिक कर रही-क्या फिर होगा युद्ध?

दो हफ़्ते के अस्थायी युद्धविराम के खत्म होने के साथ ही क्षेत्र में अनिश्चितता और बढ़ गई है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि वे किसी भी ऐसे समझौते का हिस्सा नहीं बनेंगे जो “अंतरराष्ट्रीय कानून से बाहर” हो। वहीं अमेरिका की ओर से भी सख्त रुख अपनाया गया है, जिससे बातचीत का माहौल और जटिल हो गया है।

कूटनीति या टकराव-अगला कदम क्या?

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिन बेहद संवेदनशील होंगे। अगर बातचीत का नया ढांचा तय नहीं होता, तो यह गतिरोध क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकता है। फिलहाल दोनों पक्ष बातचीत जारी रखने की बात तो कर रहे हैं, लेकिन कोई ठोस तारीख या रोडमैप सामने नहीं आया है।