JD Vance Iran Meeting: पाकिस्तान में चल रही ईरान-अमेरिका की सीक्रेट चर्चा से बड़ी खबर आ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका, ईरान की दो शर्तों को आगे नरम पड़ गया है। इधर, ईरान का भी कहना है कि 'इजराइल फर्स्ट' को छोड़कर अमेरिका अपने हितों पर आगे बढ़ता है, तो बातचीत का रास्ता निकल सकता है। 

US-Iran Peace Talks: दुनियाभर की नजरें इस वक्त पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पर टिकी हैं। जहां अमेरिका और ईरान के बड़े नेता एक मेज पर आमने-सामने हैं। लेकिन सबसे चौंकाने वाली खबर यह है कि जो अमेरिका हमेशा ईरान पर दबाव बनाता था, इस बार कुछ नरम नजर आ रहे हैं। कहा जा रहा है कि ईरान ने दो ऐसी शर्तें रखी हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना वॉशिंगटन के लिए नामुमकिन हो गया है। आइए जानते हैं पर्दे के पीछे क्या चल रहा है और क्या अमेरिका बैकफुट पर आ गया है?

ईरान की पहली शर्त: 'इजराइल फर्स्ट' नहीं, 'अमेरिका फर्स्ट' पर बात होगी

ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने सोशल मीडिया (X) पर लिखा कि अगर अमेरिका सिर्फ 'इजराइल के हितों' को ध्यान में रखकर बात करेगा, तो समझौता कभी नहीं होगा। ईरान की शर्त सीधी है कि अमेरिका को खुद के फायदे (America First) पर ध्यान देना चाहिए। अगर अमेरिका इस एजेंडे पर चलता है, तभी बातचीत आगे बढ़ेगी। ईरान का मानना है कि इजराइल के चक्कर में पड़कर अमेरिका अपना और पूरी दुनिया का नुकसान कर रहा है।

ईरान की दूसरी शर्त: फंसा हुआ पैसा तुरंत रिलीज हो

बातचीत को पटरी पर लाने के लिए अमेरिका ने ईरान की एक बहुत पुरानी मांग मान ली है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका कतर और अन्य विदेशी बैंकों में फंसी ईरान की अरबों डॉलर की संपत्ति को छोड़ने पर सहमत हो गया है। इसे एक 'गुडविल जेस्चर' माना जा रहा है। असल में ईरान को इस पैसे की सख्त जरूरत है।

आखिर क्यों नरम पड़े अमेरिका के तेवर?

इसका जवाब होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) और तेल के व्यापार में छिपा है। जानकारों का कहना है कि अमेरिका की सबसे बड़ी टेंशन 'होर्मुज स्ट्रेट' को फिर से खुलवाना है। अगर यह रास्ता बंद रहता है, तो दुनिया भर में तेल की सप्लाई रुक जाएगी। फिलहाल शिपिंग डेटा बता रहा है कि 60 से ज्यादा खाली विशालकाय तेल टैंकर (VLCC) अमेरिका की तरफ बढ़ रहे हैं। हर टैंकर में 20 लाख बैरल तेल ढोने की ताकत है। अमेरिका चाहता है कि तेल का यह खेल बिना किसी रुकावट के चलता रहे और इसके लिए ईरान को मनाना जरूरी है।

क्या ईरान को अब भी भरोसा नहीं?

भले ही बातचीत चल रही हो, लेकिन ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कह दिया है कि उन्हें अमेरिका पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं है। उनका कहना है कि अमेरिका ने बार-बार अपने वादे तोड़े हैं। इधर इस्लामाबाद में अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान की तरफ से संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ मोर्चा संभाले हुए हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान अभी मजबूत स्थिति में है और समय भी उसके पक्ष में है, जबकि अमेरिका पर जल्द से जल्द नतीजा निकालने का भारी दबाव है।

अगर बातचीत फेल हुई तो क्या होगा?

ईरान ने खुली चेतावनी दी है कि अगर समझौता नहीं हुआ, तो वह अपनी रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएगा। इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा और तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। इतना ही नहीं इसका असर पाकिस्तान से लेकर अमेरिका और खुद जेडी वेंस तक पर पड़ सकता है।