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Iran-US Tension: छुट्टी बीच में छोड़कर व्हाइट हाउस लौटे ट्रंप, ईरान से तनाव के बीच क्यों बदला प्लान?
Middle East Crisis: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कैंप डेविड में अपना वीकेंड तय समय से पहले खत्म कर दिया और शनिवार को ही व्हाइट हाउस लौट आए। ये ऐसे समय हुआ जब ईरान-अमेरिका तनाव फिर बढ़ रहा है और UN जनरल एसेंबली सत्र न्यूयॉर्क में होने वाला है।

कैंप डेविड से अचानक लौटे ट्रंप
ट्रंप को कैंप डेविड में रविवार तक रहना था, लेकिन उन्होंने एक दिन पहले ही वॉशिंगटन लौटने का फैसला किया। इस अचानक बदलाव पर अमेरिकी प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया। इसी बीच अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी नागरिकों के लिए नया सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है। इसमें क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका को लेकर सावधानी बरतने को कहा गया है।

ईरान को लेकर ट्रंप ने क्या कहा?
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप ने कहा है कि आने वाले समय में 'बहुत बड़ी चीजें; हो सकती हैं। उन्होंने ईरान को लेकर कई विकल्प खुले रखने की बात कही है। इनमें सैन्य कार्रवाई, आर्थिक दबाव और समझौते की कोशिश जैसे विकल्प शामिल हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के साथ किसी समझौते की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
ईरान ने दी अमेरिका को जवाबी हमले की धमकी
ट्रंप के बयानों और अमेरिका की संभावित अगली कार्रवाई के बीच ईरान की ओर से भी कड़ा संदेश आया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि अगर अमेरिका ने नया हमला किया तो पूरे क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और हितों को निशाना बनाया जाएगा। ईरानी सैन्य कमान का दावा है कि उसे ऐसी जानकारी मिली है कि अमेरिका कुछ क्षेत्रीय देशों की मदद से ईरान के खिलाफ फिर कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
रियाद पर हूती हमले से बढ़ी टेंशन
इसी बीच यमन के हूती विद्रोहियों के सऊदी अरब पर हमलों ने भी हालात को और पेचीदा कर दिया है। रियाद पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरों के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ा है। सऊदी अरब ने कहा कि उसकी सेना ने मिसाइलों को रोक दिया, जबकि स्थानीय तस्वीरों में एक अरामको (Aramco) फैसिलिटी के पास धुआं दिखाई देने की बात सामने आई। यमन के पश्चिमी तट पर रणनीतिक बंदरगाहों पर हूतियों के कब्जे से लाल सागर और बाब-अल-मंदब जैसे अहम समुद्री रास्तों को लेकर भी चिंता बढ़ी है।
तेल और समुद्री रास्तों पर भी असर
मिडिल ईस्ट का मौजूदा तनाव सिर्फ सैन्य स्तर तक सीमित नहीं है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और बाब-अल-मंदब जैसे अहम समुद्री रास्तों पर दबाव बढ़ने से तेल और दूसरे सामान की आवाजाही प्रभावित होने की चिंता है। रिपोर्ट के मुताबिक, हूती प्रशासन ने दावा किया कि 10 से 18 सितंबर के बीच 318 जहाज इस रास्ते से गुजरे। वहीं फ्रांस समेत कुछ यूरोपीय देश संभावित ईंधन सप्लाई की दिक्कतों को देखते हुए तैयारी कर रहे हैं।
फ्रांस ने ईरानी राजदूत को बुलाने का फैसला किया
मिडिल ईस्ट संकट के बीच ईरान और यूरोपीय देशों के बीच भी तनाव बढ़ा है। ईरानी अधिकारियों ने तेहरान में फ्रांसीसी दूतावास से जुड़े एक फ्रेंच भाषा केंद्र को बंद कर दिया। इसके बाद फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने ईरानी राजदूत को तलब करने की बात कही। ईरान की न्यायपालिका ने केंद्र पर राजनयिक नियमों के उल्लंघन से जुड़े आरोप लगाए हैं। अब नजर यूएन जनरल एसेंबली (UN General Assembly) पर है, जहां अमेरिका और मिडिल ईस्ट के कई देशों के नेता मौजूद रहेंगे।
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