सीज़फ़ायर के कुछ घंटों बाद ही लेबनान में फिर क्यों गूंजे धमाके? क्या इज़राइल-हिज़्बुल्लाह युद्धविराम टूट गया? 5 मौतों और तबाही के बीच क्या शांति समझौता सिर्फ एक छलावा साबित हुआ? नबातीह पर हमले का असली कारण क्या है? अमेरिका की मध्यस्थता वाला सीज़फ़ायर क्यों हुआ बेअसर? क्या लेबनान फिर बड़े संघर्ष की ओर बढ़ रहा है?
बेरुत/यरूशलेम: मध्य-पूर्व (Middle East) से इस वक्त की सबसे चौंकाने वाली और तनाव बढ़ाने वाली खबर सामने आ रही है। लेबनान में शांति स्थापित करने के लिए जिस युद्धविराम (Ceasefire) का दुनिया बेसब्री से इंतजार कर रही थी, वह लागू होते ही ताश के पत्तों की तरह बिखरता नजर आ रहा है। अमेरिकी मध्यस्थता के बाद इज़राइल और ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह समूह के बीच हुए सीज़फ़ायर समझौते के महज कुछ ही घंटों बाद दक्षिणी लेबनान पर इज़राइल ने दोबारा भीषण बमबारी कर दी है। इस ताजा सैन्य कार्रवाई ने पूरी दुनिया को सन्न कर दिया है और शांति बहाली के दावों पर एक बड़ा सस्पेंस खड़ा कर दिया है।


शाम 4 बजे हुआ था समझौता, रात होते ही गूंज उठे धमाके!
इस खूनी ड्रामे की शुरुआत शुक्रवार को हुई, जब एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के हवाले से खबर आई कि लेबनान में लगातार बढ़ते हिंसक तनाव को रोकने के लिए इज़राइल और हिज़्बुल्लाह आखिरकार एक सीज़फ़ायर समझौते पर सहमत हो गए हैं। इस समझौते की पुष्टि खुद इज़राइल के एक वरिष्ठ अधिकारी और हिज़्बुल्लाह के दो विश्वसनीय सूत्रों ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से की थी। तय रणनीति के अनुसार, यह ऐतिहासिक युद्धविराम शुक्रवार शाम 4 बजे (1300 GMT) से आधिकारिक तौर पर लागू होना था। पूरी दुनिया को लगा कि अब बेरुत की सड़कों पर बारूद बरसना बंद हो जाएगा, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

रात भर आसमान से बरसी मौत: ड्रोनों और लड़ाकू विमानों का तांडव
शांति की उम्मीदें तब मलबे में तब्दील हो गईं जब लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी (NNA) ने शनिवार सुबह एक खौफनाक रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के मुताबिक, सीज़फ़ायर लागू होने के बावजूद इज़राइली लड़ाकू विमानों और घातक ड्रोनों ने रात भर और शनिवार की सुबह तक दक्षिणी लेबनान के 'नबातीह' इलाके को निशाना बनाया। आसमान से रिहायशी इलाकों पर ताबड़तोड़ मिसाइलें दागी गईं, जिससे कई हंसती-खेलती इमारतें और रिहायशी घर देखते ही देखते जमींदोज़ हो गए।

भोर होने से पहले तोपों की गूंज: मलबे से निकलीं 5 लाशें
सस्पेंस और दहशत का माहौल यहीं खत्म नहीं हुआ। भोर होने से ठीक पहले, जब लोग सो रहे थे, इज़राइली तोपखाने (Artillery) ने नबातीह और उसके आस-पास के पूरे इलाके में भारी गोलाबारी शुरू कर दी। लेबनान के सरकारी मीडिया ने पुष्टि की है कि इन अचानक हुए हवाई हमलों, ड्रोन हमलों और गोलाबारी में कम से कम पांच निर्दोष लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। मलबे के नीचे कई लोगों के दबे होने की आशंका है, जिससे मौतों का आंकड़ा और बढ़ने का अंदेशा है।

सबसे बड़ा सस्पेंस: आखिर किसने तोड़ा भरोसा और अब आगे क्या?
इस खूनी उल्लंघन के बाद अब अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में हड़कंप मच गया है। सवाल यह उठ रहा है कि जब शुक्रवार शाम को सीज़फ़ायर लागू हो चुका था, तो शनिवार सुबह इतनी बड़ी सैन्य कार्रवाई क्यों की गई? क्या ज़मीनी स्तर पर कोई गलतफहमी हुई, या इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच का यह समझौता महज एक दिखावा था? वॉशिंगटन से लेकर संयुक्त राष्ट्र तक इस उल्लंघन पर पैनी नजर रखी जा रही है। अब सबसे बड़ा सस्पेंस यह है कि क्या हिज़्बुल्लाह इन 5 मौतों का बदला लेने के लिए इज़राइल पर दोबारा रॉकेट दागेगा? अगर ऐसा होता है, तो मध्य-पूर्व में शांति की आखिरी उम्मीद भी हमेशा के लिए दफन हो जाएगी।


