क्या होर्मुज़ पर ईरान का नया नियंत्रण वैश्विक शिपिंग के लिए बड़ा संकेत है? क्या 48 घंटे पहले अनुमति और अनिवार्य रजिस्ट्रेशन के पीछे कोई बड़ी रणनीति छिपी है? US-ईरान समझौते के बाद अचानक बढ़ा जहाज़ों का ट्रैफिक आखिर किस ओर इशारा कर रहा है? दुनिया की 20% ऊर्जा आपूर्ति वाले इस मार्ग पर नए नियमों का तेल बाज़ार और वैश्विक व्यापार पर क्या असर पड़ेगा?
दुबई/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक समझौते के बाद दुनिया ने राहत की सांस ली ही थी कि रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण 'होर्मुज़ जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) से एक बड़ी खबर सामने आ गई है। ईरान ने इस संकरे और वैश्विक व्यापार के लिए जीवनरेखा माने जाने वाले जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों के लिए अचानक नए और कड़े नियम लागू कर दिए हैं। हालांकि यह मार्ग अभी मुफ्त है, लेकिन ईरान के इस कदम ने समुद्री सुरक्षा एजेंसियों और व्यापारिक घरानों के बीच एक नया सस्पेंस पैदा कर दिया है।

नई अथॉरिटी 'PGSA' का गठन: सोशल मीडिया पर जारी हुआ रहस्यमयी नोटिस
ईरान ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग की सख्त निगरानी के लिए रातों-रात एक नई संस्था 'पर्सियन गल्फ़ स्ट्रेट अथॉरिटी' (PGSA) का गठन किया है। इस नई ईरानी अथॉरिटी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर एक आधिकारिक नोटिस जारी कर सनसनी फैला दी है। नोटिस के अनुसार, 'इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (MoU)' पर हस्ताक्षर होने के बाद अब केवल उन्हीं जहाजों को जलडमरूमध्य से गुजरने की इजाजत दी जाएगी, जो उनके द्वारा तय की गई सख्त शर्तों को पूरा करेंगे और पहले रजिस्ट्रेशन करवाएंगे।
48 घंटे पहले की डेडलाइन: आखिर फॉर्म में क्या छिपाना चाहता है ईरान?
ईरान द्वारा जारी नए नियमों के मुताबिक, होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले हर एक कमर्शियल जहाज को उस क्षेत्र में प्रवेश करने से कम से कम 48 घंटे पहले एक विस्तृत फॉर्म भरना अनिवार्य होगा। इस फॉर्म में जहाज का नाम, उसका झंडा (Flag), IMO नंबर, डेड वेट क्षमता, ड्राफ़्ट, कार्गो (सामान) का प्रकार, जहाज के असली मालिक का नाम और मैनेजमेंट कंपनी की पूरी कुंडली मांगी गई है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या ईरान इन जानकारियों के जरिए इस मार्ग पर अपनी सैन्य और रणनीतिक पकड़ को और मजबूत करना चाहता है?

ट्रैफिक दो महीने के उच्चतम स्तर पर: 25 जहाजों की एंट्री से बढ़ी हलचल
मैरीटाइम ट्रैकिंग फर्म AXSMarine द्वारा जारी ताजा आंकड़ों ने सबको चौंका दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के तुरंत बाद इस जलमार्ग पर कमर्शियल शिपिंग ट्रैफिक अचानक दो महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। हाल ही में एक ही दिन में रिकॉर्ड 25 कमर्शियल जहाज इस संकरे जलमार्ग से गुजरे, जो अप्रैल के मध्य के बाद से सबसे बड़ी संख्या है। सामान्य दिनों में दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत ऊर्जा (तेल और गैस) की आपूर्ति इसी संकरे रास्ते से होती है, जिससे इस ट्रैफिक का बढ़ना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है।
बारूदी सुरंगों (Mines) का खौफ और ट्रंप-पेज़ेश्कियान का वो गुप्त समझौता
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे एक खौफनाक फ्लैशबैक है। इसी साल 28 फरवरी को जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर संयुक्त हमले किए थे, तब इस पूरे जलमार्ग में शिपिंग पूरी तरह ठप हो गई थी। इस युद्ध को खत्म करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान के बीच एक समझौता (MoU) हुआ, जिसके बाद इसे दोबारा खोला गया। ईरान ने साफ किया है कि समझौते के तहत वह अगले 60 दिनों तक कोई टैक्स या शुल्क नहीं लेगा और पानी के भीतर बिछाई गई बारूदी सुरंगों (Mines) को हटाने का काम करेगा। 60 दिनों की इस मुफ्त अवधि के खत्म होने के बाद क्या होगा? क्या ईरान इस मार्ग पर पूरी तरह अपना नियंत्रण स्थापित कर लेगा? इस सस्पेंस ने पूरी दुनिया की नजरें एक बार फिर फ़ारस की खाड़ी पर टिका दी हैं।


