ईरान के IRGC से जुड़े आतंकी मोहम्मद अल-सादी की गिरफ्तारी ने दुनिया को हिला दिया। दावा है कि उसने कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप की हत्या की साजिश रची। फ्लोरिडा घर का नक्शा, धमकी भरे पोस्ट और सीक्रेट प्लान अब वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर हैं।
वाशिंगटन/न्यूयॉर्क। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भारी तनाव के बीच एक बेहद चौंकाने वाला और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मचा देने वाला खुलासा हुआ है। वाशिंगटन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी और उनकी पूर्व सलाहकार इवांका ट्रंप की हत्या की एक खौफनाक और सोची-समझी साज़िश का पर्दाफाश हुआ है। इस पूरी साज़िश के पीछे ईरान के सबसे ताकतवर और खूंखार सैन्य संगठन 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) से ट्रेनिंग पाए एक खतरनाक इराकी आतंकवादी का हाथ था। न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, इस साज़िश को अंजाम देने वाले आतंकी मोहम्मद बाकर साद दाऊद अल-सादी को हाल ही में 15 मई को तुर्की में गिरफ्तार कर लिया गया और अब उसे अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को सौंप दिया गया है।


सुलेमानी की मौत के बाद शुरू हुई खौफनाक कसम
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अल-सादी ने 2020 में ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी की अमेरिकी ड्रोन हमले में मौत के बाद बदला लेने की कसम खाई थी। सुलेमानी को वह अपना गुरु और पिता समान मानता था। बताया जा रहा है कि उसी समय उसने ट्रंप परिवार को निशाना बनाने का फैसला किया। सूत्रों के अनुसार, उसने अपने करीबियों से कहा था कि “ट्रंप के घर को उसी दर्द का एहसास कराया जाएगा।” बाद में जांच एजेंसियों को उसके पास से फ्लोरिडा स्थित इवांका ट्रंप और जेरेड कुशनर के आलीशान घर का नक्शा भी मिला।

सोशल मीडिया पोस्ट ने बढ़ाई सनसनी
2021 में अल-सादी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर एक पोस्ट साझा की थी, जिसमें इवांका के घर के इलाके का नक्शा दिखाई दे रहा था। पोस्ट में उसने लिखा था-“बदला लेना सिर्फ समय की बात है।” उसने यह भी दावा किया था कि अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां उसे रोक नहीं पाएंगी। इस पोस्ट के बाद अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने उसकी गतिविधियों पर नज़र रखना शुरू कर दिया था।

अल-सादी का खूनी आपराधिक ट्रैक रिकॉर्ड
- 1. मार्च: एम्स्टर्डम में 'बैंक ऑफ़ न्यूयॉर्क मेलन' पर बम धमाका
- 2. अप्रैल: लंदन में दो यहूदी नागरिकों पर चाकू से जानलेवा हमला
- 3. अप्रैल: टोरंटो स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर अंधाधुंध फायरिंग
कौन है मोहम्मद अल-सादी?
32 वर्षीय मोहम्मद बाकर साद दाऊद अल-सादी का जन्म बगदाद में हुआ था। उसके पिता ईरानी ब्रिगेडियर जनरल थे, जबकि उसकी परवरिश इराक में हुई। कम उम्र में उसे तेहरान भेजा गया, जहाँ उसने IRGC के साथ प्रशिक्षण लिया। उसका नाम कई अंतरराष्ट्रीय हमलों से भी जोड़ा गया है। अमेरिकी एजेंसियों के अनुसार, वह एम्स्टर्डम, लंदन और टोरंटो में अमेरिका और यहूदी ठिकानों पर हुए हमलों में शामिल रहा है। वह ईरान समर्थित आतंकी संगठन ‘कताइब हिज़्बुल्लाह’ का सक्रिय सदस्य भी बताया जा रहा है।

गिरफ्तारी के बाद बढ़ी सुरक्षा चिंता
तुर्की में गिरफ्तारी के बाद उसे अमेरिका को सौंप दिया गया। अब अमेरिकी एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या वह अकेले काम कर रहा था या उसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय था। इस खुलासे ने एक बार फिर अमेरिका-ईरान तनाव, IRGC की वैश्विक गतिविधियों और हाई-प्रोफाइल राजनीतिक हस्तियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है।


