जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के सिंहपोरा इलाके में सुरक्षा बलों और जैश-ए-मोहम्मद आतंकियों के बीच रविवार को मुठभेड़ हुई। इस दौरान आतंकियों ने ग्रेनेड फेंके, जिसमें 8 सुरक्षाकर्मी घायल हो गए। इलाके में 35 आतंकियों के छुपे होने की आशंका है।

Kashmir Terrorist Encounter: जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के सिंहपोरा इलाके में रविवार को सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें 8 जवान घायल हो गए। पुलिस के मुताबिक, इलाके में रुक-रुक कर फायरिंग जारी है। माना जा रहा है कि पाकिस्तान समर्थित जैश-ए-मोहम्मद संगठन के तीन आतंकवादी इसमें शामिल हैं।

आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर ग्रेनेड फेंके

जानकारी के मुताबिक, मुठभेड़ के दौरान आतंकवादियों ने सुरक्षाकर्मियों पर ग्रेनेड भी फेंके। हालात को देखते हुए इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मुठभेड़ में 8 सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं। इनमें से ज्यादातर जवान ग्रेनेड धमाके में घायल हुए। सभी घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है।

‘ऑपरेशन त्राशी-I’ के दौरान शुरू हुई मुठभेड़

अधिकारियों के मुताबिक, दोपहर के समय चतरू इलाके के मंडराल-सिंघोरा के पास सोनार गांव में मुठभेड़ शुरू हुई। यह घटना सेना के जम्मू-बेस्ड व्हाइट नाइट कॉर्प्स द्वारा चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन त्राशी-I’ के दौरान हुई, जो एक घेराबंदी और तलाशी अभियान था। हालात को देखते हुए अतिरिक्त फोर्स इलाके में भेजी गई है।

मुश्किल हालात में जवानों ने दिखाई बहादुरी

सेना की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, “कठिन इलाके और हालात में दुश्मन की फायरिंग का जवाब देते हुए जवानों ने शानदार और मजबूत इरादा दिखाया। ऑपरेशन जारी है और घेराबंदी को मजबूत करने के लिए और सैनिक भेजे गए हैं। सिविल एडमिनिस्ट्रेशन और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ तालमेल से काम किया जा रहा है।”

पिछले महीनों में किश्तवाड़-डोडा में कई मुठभेड़

बीते कुछ महीनों में किश्तवाड़ और आसपास के इलाकों में कई बार मुठभेड़ हो चुकी है। 8 जनवरी को कठुआ जिले में भी सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। नवंबर 2025 में किश्तवाड़ के चतरू इलाके में आतंकियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच भारी गोलीबारी हुई थी, उस वक्त J&K पुलिस और भारतीय सेना ने खास खुफिया जानकारी के आधार पर जॉइंट ऑपरेशन शुरू किया था।

पहाड़ी इलाकों में छिपे हो सकते हैं 35 पाकिस्तानी आतंकी

एक वरिष्ठ सेना अधिकारी ने पिछले महीने बताया था कि किश्तवाड़ और डोडा के पहाड़ी जंगलों में करीब 35 पाकिस्तानी आतंकवादी छिपे होने की आशंका है। सेना ने इस क्षेत्र में नई काउंटर-टेरर रणनीति लागू की है। इसके तहत बर्फ से ढके ऊंचे इलाकों में भी ऑपरेशन तेज किए जा रहे हैं। सर्दियों के सबसे ठंडे दौर, यानी ‘चिल्लई कलां’, के दौरान भी ऑपरेशनल गतिविधियां जारी रखी जा रही हैं, ताकि आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने बनाने से रोका जा सके।