कानपुर में 7 बच्चों की माँ की उसके प्रेमी ने हत्या कर दी। 10 महीने पुरानी यह हत्या बेटे की शिकायत के बाद सामने आई। आरोपी ने जुर्म कबूल कर लिया है और पुलिस ने दफनाया गया कंकाल बरामद कर लिया है।
कानपुरः पति की मौत के बाद पड़ोस में रहने वाले अपने प्रेमी के साथ रह रही 7 बच्चों की माँ की उसी के प्रेमी ने हत्या कर दी। उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के घाटमपुर तहसील के टिटवापुर में हुई इस घटना ने पूरे गाँव को दहला दिया है। 10 महीने पुराना यह मर्डर केस अब जाकर सामने आया है। कानपुर के इस टिकवापुर गाँव के लोग जब सोने की तैयारी कर रहे थे, तो पुलिस वहाँ 10 महीने पहले दफनाई गई एक लाश को बाहर निकाल रही थी। गाँव के एक टॉवर के पास जमीन खोदने में मजदूरों की मदद के लिए पुलिस की गाड़ियों की हेडलाइट्स और उनके फोन की टॉर्च जल रही थी। कुछ देर बाद, सात फीट जमीन के नीचे उन्हें एक कंकाल मिला। वहाँ मिली हड्डियाँ प्यार, वासना, नफरत और धोखे की कहानी बयां कर रही थीं।
वह कंकाल 7 बच्चों की माँ, 45 साल की रेशमा का था। रेशमा की हत्या 10 महीने पहले उसके प्रेमी गोरेलाल ने ही की थी। जब भी उसका बेटा बबलू अपनी माँ के बारे में गोरेलाल से पूछता, तो वह सीधे जवाब देता कि वह अब नहीं आएगी। शुरू में बबलू ने इसे मजाक समझा, लेकिन जब गोरेलाल बार-बार यही बात कहने लगा तो उसे शक हुआ। इसलिए, 29 दिसंबर को बेटे बबलू ने पुलिस में अपनी माँ की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाई। तब जाकर 10 महीने पहले हुआ यह मर्डर केस सामने आया।
पति की मौत के बाद पड़ोसी से हुआ प्यार
रेशमा के पति राम बाबू संखवार की तीन साल पहले मौत हो गई थी। इस दंपति के 4 बेटे और 3 बेटियाँ थीं। पति की मौत के बाद रेशमा की दोस्ती पड़ोस में रहने वाले गोरेलाल से हो गई। यह दोस्ती प्यार में बदल गई और न जाने उसे क्या हुआ कि वह अपने बच्चों को छोड़कर प्रेमी के साथ रहने लगी। माँ के इस बर्ताव से परेशान होकर बच्चों ने भी उससे रिश्ता तोड़ लिया था।
एक शादी का कार्ड: माँ के लिए बेटे की खोज
इस बीच, 29 नवंबर को रेशमा के एक रिश्तेदार की शादी थी। इस शादी में रेशमा को भी बुलाया गया था, लेकिन वह नहीं आई। इससे बेटे बबलू को अपनी माँ को लेकर शक हुआ। वह सीधा गोरेलाल के घर गया और पूछा कि उसकी माँ कहाँ है। लेकिन गोरेलाल ने बस इतना कहा कि तुम्हारी माँ अब वापस नहीं आएगी। जब बार-बार पूछने पर भी उसने कुछ नहीं बताया, तो बेटे बबलू ने पुलिस से संपर्क किया।
बबलू की शिकायत के बाद पुलिस ने गोरेलाल को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की, तो उसने सच उगल दिया। उसने बताया कि पिछले साल अप्रैल में उसका और रेशमा का झगड़ा हुआ था। वह रेशमा से छुटकारा पाना चाहता था, इसलिए उसने रेशमा को किसी रिश्तेदार के यहाँ जाकर रहने को कहा। लेकिन रेशमा ने मना कर दिया, जिससे उनके बीच अक्सर झगड़े होने लगे। ऐसे ही एक झगड़े के दौरान गोरेलाल ने रेशमा का गला घोंटकर उसे मार डाला। इसके बाद दो दिनों तक उसने लाश को घर में ही रखा और फिर ठिकाने लगाने की योजना बनाकर घर के पास एक सुनसान जगह पर दफना दिया।
कहते हैं कि एक औरत को बचपन में माता-पिता, जवानी में पति और बुढ़ापे में बच्चों के सहारे रहना चाहिए। वैसे, रेशमा की उम्र अभी बुढ़ापे वाली नहीं थी। लेकिन कोई यह नहीं कहता और न ही कहना चाहिए कि औरत को हमेशा मर्द के अधीन रहना चाहिए, क्योंकि उसकी अपनी जिंदगी और अपने सपने होते हैं। पर अगर कोई बिना सोचे-समझे, अपनी अक्ल को ताक पर रखकर जीने की कोशिश करे, तो उसका हश्र भी रेशमा जैसा हो सकता है। हमारे आसपास हो रही ऐसी कई घटनाएँ इस बात का सबूत हैं। अगर 7 बच्चों की उस माँ ने अपने बच्चों के भविष्य के बारे में सोचा होता, तो शायद यह दुखद घटना नहीं होती। लेकिन अपनी ख्वाहिशों के पीछे भागते हुए वह एक ऐसी दुनिया में चली गई, जहाँ से कोई वापस नहीं आता।
