Indian Air Force ने 2 सितंबर 2026 को बताया कि स्वदेशी रूप से डिजाइन-डेवलप Khagantak-243 का ड्रॉप परीक्षण सफल रहा। JSR Dynamics की यह प्रणाली लक्ष्य के ऊपर पहुंचे बिना दूर से सटीक प्रहार में सहायक है और स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक क्षमताओं को मजबूती देती है।

Khagantak-243 Glide Bomb: भारतीय वायुसेना ने स्वदेशी लंबी दूरी के ग्लाइड बम Khagantak-243 का सफल ड्रॉप परीक्षण पूरा किया है। वायुसेना ने 2 सितंबर 2026 को बताया कि ट्रायल के दौरान निर्धारित सभी उद्देश्यों को हासिल किया गया। IAF ने इस उपलब्धि को भारतीय वायुसेना और देश के रक्षा उद्योग के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव बताया है। वायुसेना के संदेश में इस उपलब्धि को “सटीकता, शक्ति और गर्व” से जोड़ते हुए स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

JSR Dynamics ने किया Khagantak-243 का विकास

Khagantak-243 को भारतीय रक्षा कंपनी JSR Dynamics ने विकसित किया है। इसका उद्देश्य लड़ाकू विमानों को लक्ष्य के बेहद करीब पहुंचे बिना दूर से हमला करने की क्षमता देना है। इस तरह की क्षमता को स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक के तौर पर देखा जाता है। इसमें विमान को दुश्मन के संभावित खतरनाक एयर-डिफेंस क्षेत्र में गहराई तक जाने की जरूरत कम हो सकती है। Khagantak-243 का सफल परीक्षण भारत में स्वदेशी एयर-लॉन्च हथियारों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

क्या होता है लंबी दूरी का ग्लाइड बम?

ग्लाइड बम सामान्य बमों से अलग तरीके से काम करता है। विमान से रिलीज होने के बाद यह केवल सीधे नीचे गिरने के बजाय अपने वायुगतिकीय डिजाइन की मदद से आगे की दिशा में दूरी तय करता है। इसके डिजाइन और मार्गदर्शन प्रणाली के कारण हथियार रिलीज पॉइंट से काफी आगे स्थित लक्ष्य तक पहुंच सकता है। यही क्षमता इसे स्टैंड-ऑफ हमलों के लिए उपयोगी बनाती है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि लड़ाकू विमान को हर स्थिति में सीधे लक्ष्य के ऊपर से उड़ान भरकर हथियार छोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती।

परीक्षण में हासिल किए सभी निर्धारित लक्ष्य

भारतीय वायुसेना के मुताबिक Khagantak-243 के हालिया ड्रॉप ट्रायल में तय किए गए सभी उद्देश्यों को पूरा किया गया। परीक्षण से मिले परिणाम आगे के विकास और आगामी परीक्षणों के लिए महत्वपूर्ण इनपुट उपलब्ध करा सकते हैं। किसी भी नए हथियार प्रणाली के विकास में ऐसे परीक्षण बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि इनके जरिए डिजाइन, रिलीज मैकेनिज्म, उड़ान व्यवहार और मार्गदर्शन से जुड़ी क्षमताओं का आकलन किया जाता है।

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सामान्य बम से कितना अलग है ग्लाइड बम?

सामान्य गुरुत्वाकर्षण बम विमान से छोड़े जाने के बाद मुख्य रूप से गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में नीचे की ओर जाता है। इसके विपरीत ग्लाइड बम को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि वह हवा में आगे की ओर भी दूरी तय कर सके। इस वजह से विमान और लक्ष्य के बीच दूरी बनाए रखते हुए हमला करने की क्षमता बढ़ सकती है। यही कारण है कि ग्लाइड हथियार आधुनिक एयर-वारफेयर में स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक क्षमताओं का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और कदम

Khagantak-243 का सफल परीक्षण भारतीय रक्षा उद्योग और वायुसेना के बीच बढ़ते सहयोग को भी दर्शाता है। स्वदेशी हथियार प्रणालियों के विकास से भारत को विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता कम करने और अपनी जरूरतों के अनुसार हथियार क्षमता विकसित करने में मदद मिल सकती है। IAF के लिए ऐसी प्रणालियां भविष्य के मिशनों में अधिक विकल्प और परिचालन लचीलापन उपलब्ध करा सकती हैं।

हालांकि Khagantak-243 की वास्तविक परिचालन क्षमता, रेंज और अन्य तकनीकी विवरणों के बारे में आधिकारिक रूप से उपलब्ध जानकारी सीमित है। इसलिए इसके प्रदर्शन से जुड़े किसी भी अतिरिक्त दावे को आधिकारिक परीक्षण आंकड़ों के आधार पर ही देखा जाना चाहिए।