NEET पेपर लीक विवाद पर खान सर का बड़ा हमला! NTA पर गंभीर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि “10 रुपये का डायपर लीक नहीं होता, लेकिन परीक्षा का पेपर लीक हो जाता है।” CBI जांच, सिस्टम की विफलता, छात्रों का टूटता मनोबल और बड़े नेटवर्क की आशंका ने मामले को और रहस्यमय बना दिया है। क्या इस बार असली मास्टरमाइंड बेनकाब होंगे या फिर सच फाइलों में दब जाएगा?
Khan Sir On NEET Paper Leak: नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में मचे बवाल के बीच अब शिक्षा जगत के सबसे चर्चित चेहरे खान सर ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने एनडीए सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को आड़े हाथों लेते हुए छात्रों के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ पर अपनी बेबाक राय रखी है। खान सर ने अपनी चिर-परिचित शैली में हमला बोलते हुए कहा कि अब इस एजेंसी पर भरोसा करना नामुमकिन है।

"पैंपर्स सुरक्षित हैं, पर छात्रों का भविष्य नहीं": तीखा कटाक्ष
खान सर ने पेपर लीक की घटना पर गहरा दुख जताते हुए एक ऐसा उदाहरण दिया जो अब वायरल हो रहा है। उन्होंने कहा, "बेहद शर्मनाक है कि बच्चों के 10 रुपये वाले डायपर और पैंपर्स तो लीक नहीं होते, लेकिन इन बड़ी एजेंसियों के परीक्षा पेपर लीक हो जाते हैं।" उन्होंने आगे चुटकी लेते हुए कहा कि NTA का पूरा नाम 'नेशनल टेस्टिंग एजेंसी' नहीं, बल्कि 'नेवर ट्रस्टेबल एजेंसी' (कभी भरोसा न करने वाली एजेंसी) होना चाहिए। उनके अनुसार, यह महज एक पेपर लीक नहीं, बल्कि लाखों होनहार छात्रों के आत्मविश्वास की हत्या है।
"CBI तो नोकिया फोन जैसी है": जांच पर उठाया सवाल
जब जांच की बात आई, तो खान सर ने देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) पर भी तंज कसने में कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने कहा, "सीबीआई अब नोकिया के पुराने मोबाइल जैसी हो गई है-था, जब था! इसे अंग्रेजों ने बनाया था और अक्सर इसका इस्तेमाल मुद्दों को दबाने के लिए होता है।" उन्होंने आशंका जताई कि अगर मामला सीबीआई के पास गया, तो बच्चों का एमबीबीएस (MBBS) कोर्स पूरा हो जाएगा, लेकिन जांच का नतीजा नहीं आएगा।
सुप्रीम कोर्ट से गुहार और प्रधानमंत्री को चुनौती
खान सर ने इस पूरे प्रकरण में न्यायपालिका और कार्यपालिका के हस्तक्षेप की मांग की है। उनके मुख्य सुझाव और चेतावनियां निम्नलिखित हैं:
- रिटायर्ड जज की निगरानी: उन्होंने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट के किसी रिटायर्ड जज को इस मामले का ऑब्जर्वर बनाया जाए ताकि समय सीमा के भीतर निष्पक्ष जांच हो सके।
- PM मोदी का हस्तक्षेप: खान सर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को व्यक्तिगत रूप से इस मामले में दखल देना चाहिए और दोषियों को ऐसी सजा दिलानी चाहिए जो मिसाल बने।
- राष्ट्रीय छवि का नुकसान: उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी घटनाएं भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को धूमिल करती हैं और रसूखदारों के लिए पिछले दरवाजे से रास्ते खोलती हैं।
"बदला लेती हैं एजेंसियां": इतिहास का डरावना सच
अंत में खान सर ने एक गंभीर चेतावनी दी। उन्होंने 1997 के आईआईटी-जेईई पेपर लीक और पिछले अनुभवों का हवाला देते हुए कहा कि जब भी पेपर लीक होता है, एजेंसियां अपनी गलती सुधारने के बजाय अगले साल का पेपर इतना कठिन बनाती हैं कि बच्चों की 'जान निकल जाती' है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या 2025 में भी छात्रों को इसी बदले की भावना का शिकार होना पड़ेगा?


