लखनऊ में स्कूलों के बाहर लगने वाले ट्रैफिक जाम पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने ट्रैफिक पुलिस को निर्देश दिया है कि सभी स्कूलों को CCTV कैमरे स्मार्ट सिटी से जोड़ने की लागत बताई जाए, जो करीब 1.12 लाख रुपये प्रति स्कूल आएगी।

लखनऊ के स्कूलों के बाहर लगने वाले जाम और छात्रों की सुरक्षा को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम निर्देश जारी किया है। कोर्ट ने DCP (ट्रैफिक) को आदेश दिया है कि वह शहर के सभी स्कूलों को CCTV कैमरे लगाने और उन्हें स्मार्ट सिटी के फीड से जोड़ने में आने वाले खर्च की जानकारी दें। यह कदम स्कूलों के आसपास ट्रैफिक की समस्या से निपटने के लिए उठाया गया है।

सुनवाई के दौरान DCP (ट्रैफिक) ने कोर्ट को बताया कि इस काम के लिए हर स्कूल को लगभग 1,12,100 रुपये खर्च करने होंगे। इस रकम से स्कूलों में लगे कैमरों को स्मार्ट सिटी के कंट्रोल रूम से जोड़ा जाएगा, ताकि ट्रैफिक की रियल-टाइम मॉनिटरिंग हो सके।

कोर्ट ने क्यों दिया ये आदेश?

दरअसल, हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही है, जिसमें स्कूलों की वजह से होने वाली ट्रैफिक समस्याओं का मुद्दा उठाया गया था। याचिका में कहा गया था कि स्कूलों की छुट्टी के समय लगने वाले जाम से आम लोगों को भारी परेशानी होती है और बच्चों की सुरक्षा को भी खतरा रहता है।

इसी मामले पर कोर्ट ने ट्रैफिक पुलिस से जवाब मांगा था। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कैमरों को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से जोड़ने का प्रस्ताव रखा और उसकी अनुमानित लागत भी बताई। कोर्ट ने इस प्रस्ताव पर सहमति जताते हुए ट्रैफिक पुलिस को आगे की कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

अब ट्रैफिक पुलिस की जिम्मेदारी है कि वह इस लागत और प्रक्रिया के बारे में शहर के सभी स्कूलों को सूचित करे। इस निर्देश के बाद अब गेंद स्कूलों के पाले में है। शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्हें यह खर्च उठाना पड़ सकता है। जाहिर है, इस निर्देश से उन स्कूलों पर दबाव बढ़ेगा जिनके बाहर अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है।