CM मोहन यादव ने भीलवाड़ा में सनातन मंगल महोत्सव में भाग लेकर भारतीय संस्कृति, सेवा और वसुधैव कुटुंबकम् का संदेश दिया। उन्होंने श्रीरामचन्द्र गमन पथ और श्रीकृष्ण पाथेय के विकास की जानकारी दी और 2028 के सिंहस्थ महाकुंभ के लिए संतों को आमंत्रित किया।

भीलवाड़ा। Dr. Mohan Yadav गुरुवार को राजस्थान के Bhilwara पहुंचे। यहां हरिशेवा उदासीन आश्रम में आयोजित सनातन मंगल महोत्सव, संत समागम और दीक्षा महोत्सव में उन्होंने भाग लिया। कार्यक्रम में परमपूज्य Swami Hansaramji Maharaj की गरिमामयी उपस्थिति रही। राजा भलराज भील की नगरी भीलवाड़ा में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वामी हंसरामजी महाराज से भेंट कर उनका आशीर्वाद और सानिध्य प्राप्त किया। इस अवसर पर देश-विदेश से आए संतों और विद्वानों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।

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भारतीय संस्कृति, वसुधैव कुटुंबकम् और सेवा का संदेश

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति सबके मंगल की कामना करने वाली महान और गौरवशाली परंपरा है। हमारी संस्कृति का मूल मंत्र ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ है, जो हमें पूरे विश्व को परिवार मानने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि केवल अपने लिए जीना पर्याप्त नहीं है, बल्कि संसार के सभी प्राणियों, जीव-जंतुओं, पेड़-पौधों और समस्त सृष्टि के कल्याण के लिए जीवन समर्पित करना ही सच्चा सेवाधर्म है। मुख्यमंत्री ने बताया कि भारतीय संस्कृति की जड़ें सेवा, समर्पण, विश्व बंधुत्व और ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की भावना में निहित हैं। जीवमात्र की सेवा ही भगवान की सेवा और मानवता की सच्ची सेवा है।

श्रीरामचन्द्र गमन पथ और श्री कृष्ण पाथेय विकास योजना

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ‘रा’ से राजस्थान और ‘म’ से मध्यप्रदेश मिलकर ‘राम’ की महिमा को बढ़ा रहे हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार भगवान राम और भगवान कृष्ण से जुड़े पवित्र स्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार श्रीरामचन्द्र गमन पथ और श्री कृष्ण पाथेय तैयार कर रही है, ताकि श्रद्धालुओं को इन धार्मिक स्थलों तक बेहतर सुविधाएं मिल सकें और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिले।

सिंहस्थ महाकुंभ 2028 के लिए संतों को आमंत्रण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ कुंभ के माध्यम से उज्जैन को देशभर के साधु-संतों का आशीर्वाद मिलता रहा है। सनातन परंपरा में संतों के माध्यम से ज्ञान की धारा सदियों से प्रवाहित होती रही है। उन्होंने ‘यत्र पिंडे तत्र ब्रह्मांडे’ का उल्लेख करते हुए कहा कि जैसे हमारे शरीर में है, वैसा ही ब्रह्मांड में भी है। संतों के माध्यम से हमें ईश्वर के दर्शन का अवसर मिलता है।

उन्होंने बताया कि जब बृहस्पति ग्रह सिंह राशि में प्रवेश करता है, तब सिंहस्थ का आयोजन होता है। वर्ष 2028 में उज्जैन में भव्य सिंहस्थ महाकुंभ आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने सभी संतों और साधु-महात्माओं को इसमें शामिल होकर आशीर्वाद देने के लिए आमंत्रित किया।