जूते में छिपाकर निकाला गया महाराष्ट्र TET पेपर, बिहार से मास्टरमाइंड गिरफ्तार। भिवंडी पुलिस के खुफिया स्टिंग ऑपरेशन में फंसे 13 आरोपी। जानिए ₹1.5 करोड़ के इस सीक्रेट घोटाले का सच।

मुंबई/पटना: महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पेपर लीक मामले में एक ऐसा सनसनीखेज खुलासा हुआ है, जिसने पुलिस और शिक्षा विभाग दोनों के होश उड़ा दिए हैं। जो परीक्षा हजारों युवाओं के भविष्य का फैसला करने वाली थी, उसकी अस्मत को चंद पैसों और एक अनोखी साजिश के तहत नीलाम कर दिया गया। भिवंडी पुलिस ने एक बड़े स्टिंग ऑपरेशन और ताबड़तोड़ छापेमारी के बाद इस पूरे रैकेट के मास्टरमाइंड को बिहार से दबोच लिया है। इसके साथ ही इस गिरोह के काम करने का जो तरीका सामने आया है, वह किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं है।

जूते में छिपा 'भविष्य': प्रिंटिंग प्रेस से कैसे बाहर आया प्रश्न पत्र?

जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा रहस्य यह था कि कड़ी सुरक्षा और सीसीटीवी की निगरानी के बावजूद परीक्षा का गोपनीय प्रश्न पत्र बाहर कैसे आया? पुलिस की कड़ी पूछताछ में जो सच सामने आया, उसने सबको चौंका दिया। इस खेल का मुख्य सूत्रधार बिजेंद्र कुमार गुप्ता अपने साथी सोनू के साथ मिलकर पिछले कई महीनों से जाल बिछ रहा था। उन्होंने प्रिंटिंग प्रेस के अंदर मौजूद कर्मचारियों को मोटी रकम और महंगी प्रॉपर्टी का तगड़ा लालच दिया। जब कर्मचारी इस जाल में फंस गए, तो उन्होंने सुरक्षा की आंखों में धूल झोंकने के लिए एक नायाब तरीका निकाला। प्रश्न पत्र को बेहद शातिर तरीके से एक जूते के अंदर छिपाकर प्रिंटिंग सुविधा से बाहर तस्करी कर निकाला गया। महज ₹8,000 की मामूली कीमत पर हासिल किए गए इस कागज के टुकड़े ने पूरे सिस्टम की सुरक्षा व्यवस्था को तार-तार कर दिया।

₹8,000 का वो पेपर और ₹1.5 करोड़ का महा-प्लान: आखिर कहां-कहां बिका सौदा?

प्रेस से बाहर आते ही इस लीक पेपर की कीमत आसमान छूने लगी। बिजेंद्र और उसके गैंग ने इस रैकेट के जरिए लगभग 1.5 करोड़ रुपये कमाने का महा-प्लान तैयार किया था। इस चुराए गए प्रश्न पत्र को भिवंडी और पुणे के इलाकों में सरकारी शिक्षक बनने का सपना देख रहे सैकड़ों उम्मीदवारों को मोटी रकम में बेचा गया। गिरोह के गुर्गे व्हाट्सएप और गुप्त ठिकानों के जरिए कूरियर की तरह पेपर की कॉपियां बांट रहे थे। बेरोजगार युवाओं की मजबूरी का फायदा उठाकर यह सिंडिकेट रातों-रात करोड़पति बनने की दहलीज पर खड़ा था, लेकिन तभी पुलिस ने बैकस्टेज एंट्री मारी।

भिवंडी पुलिस का 'फेक बायर' स्टिंग: जाल में ऐसे फंसा मास्टरमाइंड

जब पुलिस को भिवंडी में टेट (TET) पेपर की अवैध बिक्री की भनक लगी, तो उन्होंने इस नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए एक अचूक जाल बुना। भिवंडी पुलिस के जांबाज अधिकारी खुद संभावित खरीदार (Fake Buyers) बनकर इस सिंडिकेट के दलालों से मिले। पैसे के लेन-देन के दौरान रंगे हाथों हुई गिरफ्तारियों ने कड़ियों को जोड़ना शुरू किया। दलालों से मिले सुरागों का पीछा करते हुए पुलिस की स्पेशल टीम बिहार पहुंची। वहां छिपे बैठे कथित मास्टरमाइंड बिजेंद्र कुमार गुप्ता को घेराबंदी करके गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी को तुरंत भिवंडी पुलिस ने अपनी गिरफ्त में लिया और ट्रांजिट के लिए पुणे एयरपोर्ट लाया गया, जहां से उसे अदालत में पेश कर पुलिस कस्टडी की मांग की जाएगी।

सलाखों के पीछे 13 गुनहगार: क्या खत्म हो चुका है यह खूनी खेल?

बिजेंद्र कुमार गुप्ता की इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद अब तक इस घोटाले में पकड़े गए कुल आरोपियों की संख्या 13 हो चुकी है। इससे पहले गिरफ्तार किए गए 12 गुर्गे पहले ही जेल की सलाखों के पीछे (न्यायिक हिरासत में) दिन काट रहे हैं। मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस इस बात की तफ्तीश में जुटी है कि क्या इस रैकेट के तार शिक्षा विभाग के कुछ बड़े अधिकारियों से भी जुड़े हैं? बिहार से लेकर महाराष्ट्र तक फैले इस नेटवर्क के पूरी तरह ध्वस्त होने तक पुलिस का यह ऑपरेशन रुकने वाला नहीं है।

क्या सामने आएंगे और बड़े नाम?

महाराष्ट्र TET पेपर लीक मामले में मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी जांच के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, लेकिन कई सवाल अभी भी बाकी हैं। क्या इस रैकेट में और बड़े चेहरे शामिल थे? क्या यह नेटवर्क केवल TET तक सीमित था या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं तक भी फैला हुआ था? इन सवालों के जवाब अब बिजेंद्र कुमार गुप्ता से होने वाली पूछताछ और आगे की जांच से मिलने की उम्मीद है। फिलहाल इतना तय है कि इस गिरफ्तारी ने पेपर लीक मामले की जांच को एक नए और महत्वपूर्ण मोड़ पर ला खड़ा किया है।