मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में 13 महीने तक सुनवाई चली और 22 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज हुए। अब आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी।
मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल को मौत की सजा सुनाई है। पति सौरभ राजपूत की हत्या और शव को नीले ड्रम में छिपाने के इस मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। अब दोषसिद्धि के बाद सजा के ऐलान ने एक बार फिर इस मामले को सुर्खियों में ला दिया है। हालांकि, आगे की कानूनी प्रक्रिया में फैसले को चुनौती दिए जाने की संभावना भी महत्वपूर्ण होगी।
नीले ड्रम हत्याकांड में फांसी, कोर्ट ने क्या कहा?
अदालत ने मुस्कान और साहिल को जघन्य अपराध का दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई। दोनों को जिला जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया गया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कोर्ट ने दोनों पर अलग-अलग जुर्माना भी लगाया है। सुनवाई के दौरान अपराध की गंभीरता और उसके अनुरूप सजा देने के सिद्धांत पर जोर दिया गया। यह फैसला मामले की सुनवाई के बाद आया है। हालांकि, मौत की सजा के मामलों में आगे की न्यायिक प्रक्रिया भी अहम होती है।
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13 महीने की सुनवाई, 22 से ज्यादा गवाहों के बयान
इस मामले में अदालत ने 30 सितंबर को मुस्कान रस्तोगी और साहिल को दोषी ठहराया था। इसके बाद 14 अक्टूबर को सजा सुनाने की तारीख तय की गई थी। जानकारी के अनुसार, मुकदमे की सुनवाई के दौरान करीब 13 महीने तक कानूनी बहस चली। इस दौरान 126 तारीखों पर सुनवाई हुई और 22 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए। मृतक सौरभ राजपूत के परिवार ने दोनों दोषियों के लिए फांसी की मांग की थी।
नीले ड्रम में मिला था सौरभ का शव
सौरभ राजपूत की हत्या का मामला उस समय देशभर में चर्चा में आया, जब उनका शव घर के भीतर नीले ड्रम में मिला था। उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल पर हत्या कर शव छिपाने का आरोप लगा था। पुलिस ने 19 मार्च को दोनों को गिरफ्तार किया था।
इस मामले ने रिश्तों में विश्वास, घरेलू अपराध और आपराधिक जांच को लेकर कई सवाल खड़े किए। अब अदालत के फैसले के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी।
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