मेरठ जेल में बंद मुस्कान रस्तोगी ने करवा चौथ के लिए चूड़ियां और बिंदी मांगी हैं। सवाल यह है कि उसने किसके लिए यह व्रत रखा है। एक पति सौरभ राजपूत की वह खुद हत्या कर चुकी है, दूसरा उसका प्रेमी साहिल को कोर्ट फांसी की सजा सुना चुकी है।
करवा चौथ का नाम आते ही सुहाग की लंबी उम्र के लिए व्रत रखने वाली महिलाओं की तस्वीर सामने आती है। लेकिन मेरठ की जिला जेल में बंद मुस्कान रस्तोगी की चूड़ियों और बिंदी की मांग ने एक बार फिर सौरभ राजपूत हत्याकांड की यादें ताजा कर दी हैं। मुस्कान पर अपने पति सौरभ की हत्या का दोष साबित हो चुका है और अदालत उसे प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ फांसी की सजा सुना चुकी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर जेल में करवा चौथ को लेकर उसकी यह मांग क्यों चर्चा में है?
जेल में मुस्कान की चूड़ियों-बिंदी की मांग चर्चा में
करवा चौथ पर महिलाएं आमतौर पर सोलह श्रृंगार करती हैं और पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। इसी बीच मेरठ जिला जेल में बंद मुस्कान की ओर से करवा चौथ के लिए चूड़ियां और बिंदी मांगे जाने की खबर सामने आई है। इस मांग ने लोगों का ध्यान खींचा है, क्योंकि मुस्कान खुद अपने पति की हत्या के मामले में दोषी ठहराई जा चुकी है।
हालांकि, मुस्कान किसके लिए व्रत रखने वाली है और उसने यह मांग किस वजह से की है, इसे लेकर बिना आधिकारिक पुष्टि के कोई दावा करना सही नहीं होगा।
क्या है मुस्कान और साहिल का ताजा मामला?
मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में जिला अदालत ने 30 सितंबर 2026 को मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को पति सौरभ राजपूत की हत्या का दोषी ठहराया था। इसके बाद 14 अक्टूबर को दोनों को मौत की सजा सुनाई गई।
क्यों सुनाई गई फांसी की सजा?
यह मामला मार्च 2025 का है। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, सौरभ की हत्या के बाद उसके शव के टुकड़े करके उन्हें नीले ड्रम में रखा गया और सीमेंट से छिपाने की कोशिश की गई। अदालत ने मामले की गंभीरता और पेश किए गए सबूतों के आधार पर दोनों को हत्या और सबूत मिटाने के मामले में दोषी माना। अदालत ने इसे बेहद गंभीर अपराध मानते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई।
अब आगे क्या होगा, क्या तुरंत होगी फांसी?
फांसी की सजा सुनाए जाने का मतलब यह नहीं है कि दोनों को तुरंत फांसी दे दी जाएगी। मुस्कान और साहिल ने जिला अदालत के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उनकी अपील स्वीकार हो चुकी है और मामले में बहस के लिए 30 नवंबर 2026 की तारीख तय की गई है। हाईकोर्ट को मृत्युदंड की पुष्टि करनी होगी। इसके बाद भी सुप्रीम कोर्ट में अपील और राष्ट्रपति के पास दया याचिका जैसे कानूनी विकल्प मौजूद हैं।






