कोलकाता मेट्रो में एक महिला ने अपने बच्चे की उल्टी खुद साफ कर नागरिक ज़िम्मेदारी की मिसाल पेश की। लिंक्डइन पर वायरल इस घटना की लोगों ने खूब सराहना की। यह सार्वजनिक स्वच्छता के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है।

बेंगलुरु के एक शख्स ने एक महिला के बारे में पोस्ट किया है, जो सोशल मीडिया पर खूब तारीफें बटोर रहा है। महिला ने कोलकाता मेट्रो में अपने बच्चे की उल्टी खुद ही चुपचाप साफ कर दी। इस घटना के बारे में बताने वाला पोस्ट लिंक्डइन पर फ्लिपकार्ट के असिस्टेंट मैनेजर पवन पाटणकर ने अपलोड किया था।

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पवन ने अपने पोस्ट में बताया कि मेट्रो कोच के अंदर एक छोटे बच्चे को अचानक उल्टी हो गई। ऐसी घटनाओं पर अक्सर दूसरे यात्री मुंह बनाते हैं या उस जगह से दूर हो जाते हैं, लेकिन इसके बाद जो हुआ, वह सच में दिल छू लेने वाला था। बच्चे की मां ने बिना किसी हिचकिचाहट या शिकायत के फौरन अपनी जिम्मेदारी संभाली और रूमाल से फर्श को पोंछकर साफ कर दिया। पाटणकर के मुताबिक, यह काम नागरिक ज़िम्मेदारी की एक बड़ी मिसाल था। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि दफ्तर, सड़कें और मेट्रो जैसी सार्वजनिक जगहें हम सबकी साझा संपत्ति हैं और इन्हें साफ रखना किसी और की नहीं, बल्कि हमारी भी ज़िम्मेदारी है।

देखिए ये वायरल पोस्ट

उन्होंने लिखा, "कोई शिकायत नहीं। कोई बहाना नहीं। सिर्फ़ ज़िम्मेदारी।" उन्होंने यह भी कहा कि असली बदलाव कानूनों से नहीं, बल्कि लोगों की सोच और रवैये से आता है।

लोगों ने क्या कहा?

इस पोस्ट के कमेंट सेक्शन में लोगों ने उस मां की जमकर तारीफ की और गर्व जताया। साथ ही, लोगों ने नागरिक ज़िम्मेदारी और अच्छे बर्ताव के महत्व पर भी चर्चा की। सोशल मीडिया यूज़र्स ने मां के इस काम को सार्वजनिक जगहों पर अपनी ज़िम्मेदारी निभाने का एक सरल लेकिन असरदार उदाहरण बताया। कई लोगों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस तरह के छोटे-छोटे काम ही साझा जगहों के प्रति हमारे सम्मान और ज़िम्मेदारी की भावना को दिखाते हैं।

कई यूज़र्स ने यह भी कहा कि असली नागरिक गर्व सिर्फ़ बेहतर सुविधाओं की मांग करने में नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी में सार्वजनिक संपत्ति का ख्याल रखने में भी दिखता है।

लोगों ने गौर किया कि महिला ने सफ़ाई कर्मचारियों या अधिकारियों का इंतज़ार करने के बजाय, तुरंत खुद ही सफ़ाई शुरू कर दी। यह एक ऐसी सोच को दिखाता है जो निजी सुविधा से ऊपर समाज की भलाई को रखती है। दूसरे लोगों ने इस काम को नागरिक समझदारी का एक बेहतरीन उदाहरण बताया, जो दूसरों के लिए एक मिसाल कायम करता है। कुल मिलाकर, आम राय यह थी कि अगर ज़्यादा से ज़्यादा लोग इस तरह की आदतें अपना लें, तो शहरों में सार्वजनिक सफ़ाई और स्वच्छता में बड़ा सुधार हो सकता है।