Nagpur Police ने 4 सितंबर से 11.59 pm, 1 नवंबर 2026 तक हाई-पावर/मोडिफाइड साउंड सिस्टम और लेज़र-बीम लाइट्स पर रोक लगाई। कारण: शोर, यातायात और कानून-व्यवस्था चिंताएँ। Noise Pollution Rules के दायरे में रहने वाले सिस्टम को छूट मिलने की बात रिपोर्टों में कही गई है।
Nagpur Police DJ Ban: त्योहारों का सीजन शुरू होते ही नागपुर पुलिस ने तेज आवाज और हाई-पावर साउंड सिस्टम को लेकर सख्त कदम उठाया है। पुलिस ने 4 सितंबर 2026 से 1 नवंबर की रात 11:59 बजे तक हाई-पावर और मॉडिफाइड साउंड सिस्टम के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। यह आदेश गणेशोत्सव, दशहरा जुलूस और इस अवधि में होने वाले अन्य बड़े आयोजनों पर लागू रहेगा।
DJ, Dolby और मॉडिफाइड साउंड सिस्टम पर रोक
आदेश के तहत ऐसे साउंड सिस्टम निशाने पर हैं, जिनसे अत्यधिक तेज आवाज पैदा होती है। इनमें Dolby और Plasma Sound Systems, Pressure Music Systems और मॉडिफाइड वाहनों में लगाए गए हाई-इंटेंसिटी स्पीकर सिस्टम शामिल हैं।
पुलिस का कहना है कि इन सिस्टम से होने वाला अत्यधिक शोर लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। इसके अलावा भीड़भाड़ वाले इलाकों में तेज आवाज से ट्रैफिक व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है।
लेजर और Beam Lights को लेकर भी सख्ती
सिर्फ DJ और स्पीकर ही नहीं, बल्कि हाई-इंटेंसिटी Laser और Beam Lights के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई गई है। ऐसी रोशनी से आंखों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। साथ ही सड़क पर चलने वाले वाहन चालकों का ध्यान भटकने से दुर्घटना की आशंका भी बढ़ सकती है।
Noise Pollution Rules का करना होगा पालन
हालांकि, नियमों के तहत निर्धारित मानकों के भीतर संचालित होने वाले साउंड सिस्टम इस प्रतिबंध के दायरे से बाहर रह सकते हैं। आयोजकों को Noise Pollution Rules और प्रशासन की अनुमति से जुड़े प्रावधानों का पालन करना होगा।
नियमों के मुताबिक सार्वजनिक स्थानों पर Loudspeaker या Public Address System के इस्तेमाल के लिए लिखित अनुमति जरूरी होती है। आम तौर पर रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर रोक रहती है, हालांकि नियमों में कुछ सीमित परिस्थितियों में छूट का प्रावधान भी है।
अस्पताल और स्कूल जैसे Silence Zones में ज्यादा सख्ती
Noise Pollution को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग इलाकों के लिए अलग Ambient Noise Standards तय किए गए हैं। रिहायशी इलाकों में दिन और रात के लिए अलग-अलग ध्वनि सीमा निर्धारित है। अस्पताल, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य Silence Zones के आसपास नियम और ज्यादा सख्त हो सकते हैं।
DJ और इवेंट कारोबार से जुड़े लोगों की चिंता
पुलिस के इस फैसले से Sound System Operators, DJs, Lighting Companies, वाहन मालिकों और त्योहारों से जुड़े दूसरे कामगारों के बीच चिंता भी है। इन कारोबारों के लिए गणेशोत्सव और दशहरा जैसे बड़े आयोजन कमाई का महत्वपूर्ण समय होते हैं।
कुछ कारोबारियों और ऑपरेटरों का तर्क है कि पूरी तरह रोक लगाने के बजाय तय Decibel Limit के आधार पर साउंड सिस्टम को नियंत्रित किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि नियमों का पालन कराने के लिए प्रभावी Monitoring और उल्लंघन पर कार्रवाई का रास्ता अपनाया जा सकता है।
शोर से आम लोगों को भी परेशानी
दूसरी तरफ, तेज आवाज के खिलाफ लंबे समय से शिकायत करने वाले लोगों का कहना है कि त्योहारों के दौरान अत्यधिक शोर से बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्गों की दिनचर्या और अस्पतालों में मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है। Night-shift में काम करने वाले लोगों के लिए भी देर रात तक तेज आवाज मुश्किल पैदा करती है।
सख्ती और जश्न के बीच संतुलन की जरूरत
ऐसे में एक व्यावहारिक रास्ता यह हो सकता है कि त्योहारों की परंपरा और मनोरंजन को बनाए रखते हुए साउंड सिस्टम के लिए तय सीमा, निर्धारित समय और अनुमति व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाए। Speaker की दिशा नियंत्रित करने, Calibrated Sound Systems इस्तेमाल करने और मौके पर Monitoring से शोर कम किया जा सकता है।
नागपुर पुलिस का यह आदेश इसी बहस के बीच आया है कि त्योहारों की खुशी और लोगों के स्वास्थ्य व सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।


