Nitish Kumar Deputy PM: जेडीयू के बाद आरजेडी ने भी नीतीश कुमार को उप-प्रधानमंत्री बनाने की मांग उठाई है। जानिए मोदी कैबिनेट विस्तार की चर्चाओं के बीच क्यों तेज हुई यह मांग, क्या हैं इसके राजनीतिक मायने और बिहार की राजनीति पर इसका क्या असर पड़ सकता है।
बिहार की राजनीति में एक बार फिर नीतीश कुमार को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। पहले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और अब जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने भी मांग की है कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को केंद्र सरकार में उप-प्रधानमंत्री (Deputy Prime Minister) बनाया जाए। नरेंद्र मोदी सरकार में संभावित कैबिनेट विस्तार की अटकलों के बीच इस मांग ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है।

JDU विधायक ने क्या कहा?
जेडीयू विधायक पंकज मिश्रा ने एबीपी न्यूज़ से बातचीत में कहा कि नीतीश कुमार को उनके लंबे राजनीतिक अनुभव का सम्मान मिलना चाहिए। उनके मुताबिक, नीतीश कुमार करीब 20 वर्षों तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे हैं और इससे पहले केंद्र सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि अगर मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार होता है तो नीतीश कुमार को उप-प्रधानमंत्री बनाया जाना चाहिए। उनका दावा था कि बिहार के लोग भी यही चाहते हैं और यही उनके राजनीतिक योगदान का उचित सम्मान होगा।
RJD भी कर चुकी है ऐसी मांग
दिलचस्प बात यह है कि जेडीयू से पहले आरजेडी के वरिष्ठ नेता मुकेश रोशन भी यही मांग उठा चुके हैं। उन्होंने कहा था कि नीतीश कुमार को केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी मिलनी चाहिए। उनके अनुसार, उन्हें कृषि या रेलवे जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों के साथ उप-प्रधानमंत्री का पद भी दिया जा सकता है। आरजेडी का कहना है कि यदि ऐसा होता है तो यह पूरे बिहार के लिए सम्मान की बात होगी।
कैबिनेट विस्तार की अटकलों के बीच बढ़ी चर्चा
दरअसल, केंद्र सरकार में जल्द कैबिनेट विस्तार की संभावना जताई जा रही है। इसी वजह से राजनीतिक दल अपने-अपने नेताओं के लिए बड़ी जिम्मेदारियों की मांग कर रहे हैं। जेडीयू ने भी इसी समय नीतीश कुमार का नाम आगे बढ़ाया है। फिलहाल नीतीश कुमार राज्यसभा के सदस्य हैं और पार्टी की कमान उनके हाथों में है। बिहार की राजनीति में उनका प्रभाव अब भी कायम माना जाता है।
बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव
नीतीश कुमार ने 14 अप्रैल 2026 को बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था। इससे पहले 10 अप्रैल को वे राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए। उनके इस्तीफे के बाद 15 अप्रैल 2026 को सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना बीजेपी के लिए ऐतिहासिक माना गया, क्योंकि पहली बार पार्टी को बिहार में मुख्यमंत्री पद मिला।


