इंजीनियर युवराज की मौत के बाद पहली बड़ी गिरफ्तारी, बिल्डर पहुंचा सलाखों के पीछे
ग्रेटर नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस ने नामजद बिल्डर को गिरफ्तार किया है। लापरवाही, खुले गड्ढे और रेस्क्यू में देरी ने सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

युवराज मौत केस में बड़ा एक्शन, नामजद बिल्डर गिरफ्तार
ग्रेटर नोएडा की एक सर्द रात, घना कोहरा और सड़क किनारे खुला मौत का गड्ढा, यही वो हालात थे, जिन्होंने 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की जिंदगी छीन ली। यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं रहा, बल्कि लापरवाही, गैर-जिम्मेदारी और सुस्त सिस्टम की भयावह तस्वीर बनकर सामने आया है। अब इस मामले में पुलिस की कार्रवाई और जांच ने पूरे प्रशासन को कटघरे में ला खड़ा किया है।
युवराज मेहता की मौत के मामले में पुलिस ने अहम कदम उठाते हुए नामजद बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। अभय कुमार एमजेड विजटाउन का मालिक है और उसकी गिरफ्तारी नॉलेज पार्क थाना पुलिस ने की है। पुलिस जांच में युवराज की मौत से जुड़ी उसकी भूमिका सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई। इस केस में लोटस ग्रीन्स कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और विजटाउन प्लानर्स के खिलाफ पहले ही एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। बताया गया है कि विजटाउन ने यह संपत्ति वर्ष 2020 में लोटस ग्रीन्स से खरीदी थी।
कोहरे में छिपा था मौत का गड्ढा
यह दर्दनाक हादसा 16 जनवरी की रात नोएडा के सेक्टर-150 में हुआ। युवराज अपनी कार से जा रहे थे, तभी घने कोहरे के कारण वाहन अनियंत्रित हो गया और एक निर्माणाधीन स्थल के पास पानी से भरे गहरे गड्ढे में गिर गया। यह गड्ढा एक मॉल के बेसमेंट के निर्माण के लिए खोदा गया था, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि मौके पर न तो कोई बैरिकेडिंग थी और न ही चेतावनी बोर्ड। एक खुला गड्ढा, अंधेरा और कोहरा, यही वजह बनी इस जानलेवा हादसे की।
SIT ने संभाली जांच, अफसर मौके पर पहुंचे
युवराज की मौत के मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम ने अपनी जांच शुरू कर दी है। मेरठ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक भानु भास्कर के नेतृत्व में गठित इस टीम में मेरठ के मंडलायुक्त भानु चंद्र गोस्वामी और लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता अजय वर्मा भी शामिल हैं। जांच टीम ने सबसे पहले नोएडा विकास प्राधिकरण के कार्यालय पहुंचकर रिकॉर्ड खंगाले और इसके बाद मृतक के परिजनों से भी मुलाकात कर उनका पक्ष जाना।
80 मिनट तक जिंदगी की जंग, मदद के लिए पुकारता रहा युवराज
इस पूरे मामले का सबसे दिल दहला देने वाला पहलू रेस्क्यू में हुई देरी है। स्थानीय लोगों और परिजनों के अनुसार, युवराज करीब 80 मिनट तक कार की छत पर खड़े होकर मोबाइल की टॉर्च जलाते रहे और मदद के लिए चिल्लाते रहे। उन्होंने अपने पिता को फोन कर कहा “पापा मुझे बचा लो, मैं मरना नहीं चाहता।” लेकिन ठंडे पानी और कम दृश्यता का हवाला देकर पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम पानी में उतरने से बचती रही। करीब साढ़े चार घंटे बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ, लेकिन तब तक युवराज की जान जा चुकी थी।
नोएडा अथॉरिटी पर लापरवाही के आरोप
इस हादसे के बाद नोएडा अथॉरिटी की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण स्थल पर सुरक्षा के उचित इंतजाम होते, तो इस हादसे को टाला जा सकता था। हैरानी की बात यह भी है कि घटना के चार दिन बाद तक युवराज की कार को गड्ढे से बाहर नहीं निकाला जा सका, जो प्रशासनिक लापरवाही की एक और मिसाल बन गया।
युवराज मेहता की मौत ने यह साफ कर दिया है कि सड़क सुरक्षा, निर्माण स्थलों की निगरानी और आपातकालीन रेस्क्यू सिस्टम में बड़ी खामियां हैं। अब देखना यह है कि SIT की जांच में किन-किन जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होती है और क्या इस हादसे से सबक लेकर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा।
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